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नमामि गंगेः गोमुख से ऋषिकेश तक बनेगा गंगा बेसिन
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 14 Oct 2015 09:22 AM IST
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नमामि गंगे परियोजना के तहत उत्तराखंड में गोमुख से ऋषिकेश तक पूरा गंगा बेसिन लिया जाएगा।
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उत्तराखंड में हरिद्वार और बाकी चार अन्य प्रदेशों में इस परियोजना के तहत गंगा के दोनों तरफ पांच-पांच किमी क्षेत्र में ही वनीकरण किया जाएगा।
परियोजना के संबंध में यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल ने अपनी रिपोर्ट वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) देहरादून को उपलब्ध करा दी है, सिर्फ उत्तराखंड की रिपोर्ट अभी अधूरी है। पांचों प्रदेशों की रिपोर्ट मिलने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
केंद्र की नमामि गंगे परियोजना के तहत पांचों प्रदेशों में गंगा किनारे वनीकरण के संबंध में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के लिए एफआरआई को दायित्व सौंपा गया है। एफआरआई परियोजना की नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रही है। इस संबंध में पांचों प्रदेशों की कई राउंड बैठक हो गई है।
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इनमें प्रदेशों के नोडल अफसरों ने अपने क्षेत्र की रिपोर्ट दी थी। गत माह हुई बैठक में कई प्रदेशों की रिपोर्ट में संशोधन किया गया। एफआरआई को प्रदेशों की संशोधित रिपोर्ट भी मिल गई है। एफआरआई की निदेशक डॉ. सविता ने बताया कि उत्तराखंड से कुछ जगहों की रिपोर्ट अभी मिलनी है, बाकी प्रदेशों से सारी सूचना आ गई है।
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इन रिपोर्टों के अध्ययन के बाद विस्तृत परियोजना तैयार की जाएगी। गोमुख से ऋषिकेश तक पूरा गंगा बेसिन परियोजना में शामिल किया जाएगा। हरिद्वार से गंगा के दोनों तरफ पांच-पांच किमी जगह को लिया जाएगा।
गंगा बेसिन के तहत होंगे ये काम
वरिष्ठ विज्ञानी डॉ. ओमवीर सिंह ने बताया कि नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा बेसिन में जहां पेड़ कम हैं वहां बड़े पैमाने पर पौधारोपण करवाया जाएगा। इसके साथ ही मृदा संरक्षण के लिए कार्य किए जाएंगे। जिन स्थानों पर खेती होती है वहां भी पौधे लगाए जाएंगे। बेसिन में जहां ‘वेट लैंड’ है उसका पुनरुद्धार किया जाएगा।
यमुना किनारे भी होगा वनीकरण
गंगा की तरह यमुना किनारे भी वनीकरण की परियोजना बनाई जाएगी। इस संबंध में केंद्र सरकार ने एफआरआई को पत्र भेजा है। एफआरआई की निदेशक डॉ. सविता का कहना है कि नमामि गंगे परियोजना पूरी होने के बाद यमुना की परियोजना को टेक-अप करेंगे।