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राष्ट्रीय नदी गंगा, यमुना में स्थायी जलप्रवाह सुनिश्चित कराने को नदियों के आसपास अधिक से अधिक वृक्षारोपण पर वैज्ञानिकों ने दिया

Tue, 08 Mar 2022 01:29 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 01:29 AM IST
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Ganga and Yamuna river project prepared by botanists of Forest Research Institute
राष्ट्रीय नदी गंगा और यमुना के साथ ही देश की तमाम नदियों को साफ सुथरा बनाने के साथ ही निरंतर जलप्रवाह सुनिश्चित कराया जा सके, इसके लिए नदियों के आसपास बृहद पैमाने पर पौधरोपण करना होगा। गंगा और यमुना नदी को साफ सुथरा बनाने के साथ ही निरंतर जलप्रवाह हो इसके लिए वन अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों की ओर से गंगा - यमुना नदी परियोजना का मसौदा भी तैयार किया गया है। उक्त बातें आईसीएफआरआई महानिदेशक और एफआरआई निदेशक अरुण सिंह रावत ने कहीं। निदेशक रावत एफआरआई के वन पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन प्रभाग की ओर से भारतीय वन सेवाओं के अधिकारियों के लिए ‘जल गुणवत्ता सुधार के लिए वन प्रबंधन’ पर आयोजित एक सप्ताह के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे।
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निदेशक रावत ने प्रतिभागियों को एफआरआई की ओर से किए गए वानिकी जल विज्ञान अध्ययनों के बारे में अवगत कराने के साथ संस्थान के विशेषज्ञों की ओर से तैयार गंगा और यमुना नदी परियोजना के बारे में विस्तृत जानकारी दी। साथ ही इन नदियों में स्थायी जल प्रवाह में सुधार के लिए मिट्टी और पानी के संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधरोपण पर जोर दिया। निदेशक रावत ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण कार्यक्रम संरचना के बारे में परिचित कराया। उन्होंने डॉ. राजीव तिवारी के उत्तराखंड में स्वस्थ और अवक्रमित बांज वनों की हाइड्रोलॉजिकल सेवाओं की तुलना पर किए गए अध्ययन पर प्रकाश डाला। बताया कि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का उद्देश्य वन जल विज्ञान से संबंधित मुद्दों की समझ विकसित करना, प्रबंधन योजना विकसित करना और वानिकी सुधार के जरिये पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए नीतियां विकसित करना है।
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उद्घाटन सत्र में सभी प्रभागों के अध्यक्ष, आईएफएस अधिकारी वरिष्ठ वैज्ञानिक, डीन एफआरआई डीम्ड यूनिवर्सिटी, रजिस्ट्रार एफआरआई, संस्थान के तकनीकी कर्मचारी शामिल हुए। प्रशिक्षण कार्यक्रम एक हफ्ते तक चलेगा, जिसमें सोलह विशेषज्ञ वानिकी हस्तक्षेप के माध्यम से पानी की गुणवत्ता में सुधार पर अपने अनुभव और जानकारियां साझा करेंगे। प्रतिभागियों को वन अनुसंधान संस्थान की ओर से किए गए हस्तक्षेपों से परिचित कराने के लिए मसूरी वन प्रभाग में कैंपटी वाटरशेड और आईसीएआर-भारतीय मृदा और जल संरक्षण संस्थान की ओर से पुनर्वास क्षेत्र दिखाने के लिए सहस्रधारा के लिए एक फील्ड टूर कराया जाएगा। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में केरल, कर्नाटक, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, नागालैंड, उत्तराखंड, ओडिशा और राष्ट्रीय राजधानी नईदिल्ली के 17 आईएफएस अधिकारी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण की शुरुआत डॉ. वीपी पंवार ने अधिकारियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में डॉ. परमानंद कुमार समेत संस्थान के कई वैज्ञानिक व अधिकारी उपस्थित थे।
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