Gandhi Jayanti 2019: तीन दिनी प्रवास पर अल्मोड़ा आए बापू के लिए ढाई दिन में बना दी थी कुटिया
- ताड़ीखेत से गांधी ने कुमाऊं में जलाई थी आजादी की अलख
- 1929 में तीन दिनी प्रवास पर ताड़ीखेत पहुंचे थे राष्ट्रपिता गांधी
- बापू ने पुरानी सब्जी मंडी में छोटे नीम के पेड़ के नीचे की थी सभा
- इसी दिन कुमाऊं परिषद का कांग्रेस में हुआ था विलय
- लाला नानक के आवास पर रात्रि विश्राम किया था बापू ने
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विस्तार
आजादी की लड़ाई में अल्मोड़ा के रानखेत क्षेत्र का योगदान भी अहम है। यही वह स्थान है, जहां से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी में कुमाऊं के रणबांकुरों में जोश भरा था। गांधी जी के अचानक आगमन की सूचना सुन लोगों ने ताड़ीखेत में उनके ठहरने के लिए ढाई दिन में एक कुटिया का निर्माण कर दिया। 1929 में महात्मा गांधी यहां प्रवास पर आए और तीन दिन कुमाऊं भर से पहुंचे रणबांकुरों के समक्ष उन्होंने आजादी की अलख जलाई। महात्मा गांधी के जाने के बाद यह कुटिया आंदोलनकारियों का प्रशिक्षण केंद्र भी रही।
1929 में महात्मा गांधी ताड़ीखेत प्रवास पर पहुंचे। उनके आगमन की सूचना सुनकर आंदोलनकारियों और क्षेत्रवासियों में काफी उत्साह भर गया। महात्मा गांधी के प्रवास के लिए यहां प्रेम विद्यालय के पास ढाई दिन में कुटिया का निर्माण हुआ। गांधी जी 17 जून को ताड़ीखेत पहुंचे और कुटिया से ही उन्होंने आंदोलनकारियों में आजादी की अलख जलाई। तत्कालीन आंदोलनकारी गोविंद बल्लभ पंत, हरगोविंद पंत, स्व. देवकी नंदन सहित तमाम लोगों ने गांधी जी की अगवानी की। तीन दिन तक रानीखेत उपमंडल के अलावा कुमाऊं भर के आंदोलनकारियों का यहां हुजूम उमड़ पड़ा। ताड़ीखेत की कुटिया आज भी गांधी कुटीर के नाम से जानी जाती है।
वर्षों तक उपेक्षा का दंश झेलती रही गांधी कुटिया
आजादी के आंदोलन की गवाह रही ताड़ीखेत की गांधी कुटिया धीरे-धीरे उपेक्षित होती गई। देखरेख और रख-रखाव के अभाव में कुटिया जीर्ण-शीर्ण हालत में पहुंच गई। हालांकि कुछ साल पहले विधायक करन माहरा की पहल पर इस कुटिया का सरकार ने जीर्णोद्धार कराया। गांधी कुटीर संरक्षण समिति कुटिया की देखभाल करती है। कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष गोपाल देव ने बताया कि शासन प्रशासन की तरफ से इस ऐतिहासिक कुटिया के संरक्षण को कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।
बापू ने 1929 शहीद पार्क लक्ष्मेश्वर से किया था जनसभा को संबोधित
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अल्मोड़ा भ्रमण पर भी आए। राष्ट्रपिता ने 20 जून 1929 को लक्ष्मेश्वर मैदान में विशाल जनसभा को संबोधित किया और स्वतंत्रता की अलख जगाई। इस मैदान को अब गांधी सभा स्थल शहीद पार्क लक्ष्मेश्वर के नाम से जाना जाता है। कुमाऊं भ्रमण के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 19 जून 1929 की शाम को अल्मोड़ा पहुंचे थे। राष्ट्रपिता ने रानीधारा में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हरीश चंद्र जोशी के घर पर रात्रि विश्राम किया। वर्तमान में इस भवन में ग्रेस स्कूल संचालित है।
20 जून को लक्ष्मेश्वर मैदान में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जनसभा हुई। जिसमें लोगों की काफी भीड़ जुटी। राष्ट्रपिता ने लोगों खासकर युवाओं में आजादी के आंदोलन के प्रति जोश भरा। उन्होंने कहा कि अब आप लोग डर को बिल्कुल छोड़ दें, क्योंकि स्वराज के मार्ग में डर रुकावट है। इसके बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कौसानी गए। पालिका परिषद ने गांधी सभा स्थल लक्ष्मेश्वर को संरक्षित किया है। यहां पर शहीद स्मारक स्थापित किया गया है। जिसे अब गांधी सभा स्थल शहीद पार्क लक्ष्मेश्वर के नाम से जाना जाता है।
जीबी पंत के बुलावे पर काशीपुर आए थे गांधी जी
पंडित गोविंद बल्लभ पंत के बुलावे पर महात्मा गांधी चार जुलाई 1929 को काशीपुर पहुंचे थे। महात्मा गांधी ने पुरानी सब्जी मंडी स्थित छोटे नीम के पेड़ के नीचे सभा को संबोधित किया था। अपने भाषण में उन्होंने गरीबी, खादी के प्रचार, आत्म स्वावलंबन, ग्रामीण विकास के मुद्दों पर अपनी राय रखी थी। इसी दिन गोविंद बल्लभ पंत ने कुली बेगार आंदोलन को लेकर गठित कुमाऊं परिषद का कांग्रेस में विलय करने की घोषणा की थी। काशीपुर में रात्रि विश्राम के बाद महात्मा गांधी दिल्ली रवाना हुए थे।
पोरबंदर (गुजरात) से महात्मा गांधी 13 जून 1929 को बरेली पहुंचे थे। उन्होंने भवाली, ताड़ीखेत, अल्मोड़ा, और बागेश्वर आदि 26 जगहों पर सभाएं की थीं। 21 जून से दो जुलाई तक उनका प्रवास कौसानी में रहा। काशीपुर पं. गोविंद बल्लभ पंत की जन्मभूमि थी। कुली बेगार के विरोध में 1920 में गठित कुमाऊं परिषद के बैनर तले पं. पंत स्वतंत्रता के आंदोलन में बढ़ चढ़कर शिरकत कर रहे थे। आजादी के आंदोलन को धार देने के लिए वर्ष 1914 में हिंदी प्रेम सभा का गठन किया गया था। इसकी बैठकों के बहाने आंदोलनकारी स्वतंत्रता संग्राम की रणनीति तय करते थे। आंदोलन को लेकर पंत की ख्याति देशभर में थी। उन दिनों काशीपुर आजादी के आंदोलन का गढ़ था, जिसके चलते सरकार ने काशीपुर को ब्लैक लिस्ट कर रखा था।
स्वतंत्रता सेनानी किशोरी लाल गुड़िया के पुत्र विमल गुड़िया ने अपने पिता और दादा द्वारा बताए गए संस्मरणों का जिक्र करते हुए कहा कि अपने कौसानी प्रवास के दौरान महात्मा गांधी ने पंडित पंत को मिलने के लिए वहां बुलाया था। पंत के अनुरोध पर गांधी तीन जुलाई को रामनगर होते हुए काशीपुर पहुंचे।
नशाबंदी, ग्रामीण विकास और आंचलिक संकीर्णता से दूर रहने का दिया था संदेश
काशीपुर में श्री अग्रवाल सभा भवन में गांधी जी के लिए भोजन का प्रबंध किया गया था। इसके बाद गांधी पुरानी सब्जी मंडी स्थित छोटे नीम के पेड़ के नीचे पहुंचे। अपने संबोधन में गांधी जी ने स्वदेशी अपनाने के साथ ही नशाबंदी, ग्रामीण विकास और आंचलिक संकीर्णता से दूर रहने की बात कही। इस सभा में पं. पंत के अलावा कल्याण गुड़िया, पं. रामशरण सारस्वत, उमाशंकर वैद्य, बालमुकुंद माहेश्वरी, लाला मिठ्ठन लाल, किशोरी लाल गुड़िया, कुंवर आनंद सिंह, गुरु रामदत्त पंत, डॉ. हरदत्त पंत, रघुनंदन प्रसाद लोहिया आदि शामिल हुए। गांधी ने रात्रि विश्राम स्टेशन रोड पर मालगोदाम के सामने लाला नानक चंद्र खत्री के आवास पर किया। यहीं पर पं. पंत ने कुमाऊं परिषद के कांग्रेस में विलय करने की घोषणा की। बाद में लाला खत्री के वारिसान से यह मकान जसपुर के पूर्व ब्लॉक प्रमुख हरगोविंद सिंघल ने खरीदा लिया।
बैलगाड़ी से अग्रवाल सभा पहुंचे थे महात्मा गांधी
काशीपुर। महात्मा गांधी के काशीपुर आने की सूचना पर उदयराज हिंदू इंटर कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी के पद पर कार्यरत गोला सिंह अपनी बैलगाड़ी लेकर रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। उनकी बैलगाड़ी से ही महात्मा गांधी और पं. गोविंद बल्लभ पंत मोहल्ला सिंघान स्थित अग्रवाल सभा भवन पहुंचे थे। अन्य स्वतंत्रता सेनानी बैलगाड़ी के साथ पैदल चल रहे थे। अग्रवाल सभा से महात्मा गांधी और अन्य पैदल ही सभास्थल पहुंचे।
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