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वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों टीमों ने विकसित की नींम की छह नई प्रजातियां

Sun, 21 Nov 2021 01:30 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 21 Nov 2021 01:30 AM IST
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FRI scientists developed six new species of neem
देहरादून। इंडियन काउंसिल आफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (आईसीएफआरई) से जुड़े वन अनुसंधान संस्थान देहरादून के वैज्ञानिकों ने नीम की छह नई प्रजातियां विकसित की हैं। इन प्रजातियों से सामान्य नीम की तुलना में दोगुना तेल उत्पादन संभव होगा। साथ ही बड़े पैमाने पर लकड़ी का उत्पादन किया जा सकेगा। नीम की इन प्रजातियों का उत्पादन किए जाने से किसानों की आर्थिकी में व्यापक सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई वनस्पतियों की नई प्रजातियों को केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की मंजूरी भी दे दी गई है।
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केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव सुभाष चंद्रा में वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई प्रजातियों को बड़ी उपलब्धि बताते हुए इनके व्यवसायिक उत्पादन की भी मंजूरी दी। कार्यक्रम में आईसीएफआरई के महानिदेशक व वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक अरुण सिंह रावत, वैरायटी रिलीजिंग कमेटी (वीआरसी) के उपाध्यक्ष एसडी शर्मा, वीआरसी के सदस्य सचिव सुजीत, डॉक्टर संजीव ठाकुर, डॉक्टर विजय त्यागी, वैद्यनाथन हरिहरन, डॉक्टर डीएन पांडे, यूपी के पीसीसीएफ केपी दुबे, एफआरआई के डॉ. केपी सिंह बड़ी संख्या में वैज्ञानिक उपस्थित थे।
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चार संस्थानों ने विकसित की 22 प्रजातियां
आईसीएफआरई से जुड़े इंस्टीट्यूट आफ फॉरेस्ट जेनेटिक एंड ट्री ब्रीडिंग कोयंबटूर, इंस्टीट्यूट आफ फॉरेस्ट प्रोडक्टिविटी रांची और एरिड फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट जोधपुर के वैज्ञानिकों ने वनस्पतियों की 22 नई प्रजातियों को विकसित की हैं। आईसीएफआरई के निदेशक व वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक अरुण सिंह रावत ने बताया कि इंस्टीट्यूट आफ फॉरेस्ट जेनेटिक्स एंड ट्री ब्रीडिंग कोयंबटूर के वैज्ञानिकों ने यूकेलिप्टस समेत तीन प्रजातियों की वनस्पतियों को विकसित किया है। वैज्ञानिकों ने यूकेलिप्टस हाइब्रिड के दो क्लोन विकसित किए हैं। जिनसे बड़े पैमाने पर लकडी व तेल का उत्पादन किया जा सकेेगा।
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