आजाद हिंद फौज के सिपाही पदम सिंह कोरंगा का 101 साल की उम्र में निधन, छह माह सिंगापुर में रहे थे बंदी
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उत्तराखंड में कपकोट ब्लॉक के सुदूरवर्ती भनार गांव के पांखू तोक निवासी आजाद हिंद फौज के स्वतंत्रता सेनानी पदम सिंह कोरंगा की 101 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। प्रशासन की ओर तहसीलदार मेनपाल सिंह और पुलिस अधीक्षक महेश जोशी ने कोरंगा के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की।
सरयू और गोमती के संगम पर राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि की गई। स्वतंत्रता सेनानी की चिता को उनके बेटे खुशहाल सिंह और खीम सिंह ने मुखाग्नि दी। 1918 में भनार गांव निवासी दौलत सिंह कोरंगा के घर जन्मे पदम सिंह में बचपन से ही देश भक्ति का जज्बा था।
किसी काम से वर्ष 1942 में अल्मोड़ा गए और पदम सिंह का वहां आजाद हिंद फौज में चयन हो गया। लखनऊ में तीन महीने के प्रशिक्षण लेने के बाद उनकी पूरी ब्रिगेड आगरा चली गई। यहां से वह मुंबई गए और जहाज से सिंगापुर पहुंचे। छह महीने तक युद्ध करते वह जापान के कैदी हो गए।
कोरंगा कई बार हुए सम्मानित
अंग्रेजों को अलग और हिंदुस्तानियों को अलग रखा गया। हिंदुस्तानियों को गांधी के आदमी के नाम से पुकारा जाता था। जेल से बाहर आने के बाद देश के लिए लड़ाई लड़ते हुए बैंकाक होते हुए वह रंगून पहुंचे। यहां भी उन्हें जियाबाड़ी और वर्मा की जेलों में बंद होना पड़ा। इस दौरान उन्होंने कई यातनाएं सहीं। देश की आजादी से कुछ समय पहले वह घर आए।
दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी पदम सिंह कोरंगा को तत्कालीन दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने वर्ष 1985 में दिल्ली में सम्मानित किया था। नौ नवंबर 2001 को देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें सम्मानित किया था।
तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी ने भी उन्हें ताम्रपत्र और 20 हजार रुपया नकद भेंट किए थे। 09 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम और इसी तरह 26 जनवरी 2015 को तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित किया था।