दून में शराब के ठेको के आवंटन में हुआ फर्जीवाड़ा, ऐसे हुआ पूरा खेल
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दून में शराब के करोड़ों के ठेकों के आवंटन में जमकर खेल हुआ है। आबकारी नीति को ताक पर रखकर इसके आवंटन में जहां दोहरी नीति अपनाई गई। वही मंगलवार को 37 ठेकों के आवंटन में ठेकेदारों ने पूल सिस्टम अपनाकर राजस्व की चपत लगाई।
इस बारे में एडीएम वीर सिंह गुदियाल व सीडीओ बंशीधर तिवारी से पूछे जाने पर वह चुप्पी साध गए। वही जिला आबकारी अधिकारी मनोज उपाध्याय का कहना है कि वह नये आए हैं। शासन से जिस तरह के निर्देश थे वही प्रक्रिया अपनाई गई है।
दून में मंगलवार को 35 ठेकों की बोली लगी, लेकिन अधिकतर बोली के दौरान पुल सिस्टम साफ नजर आया। दुकान के लिए जितनी धनराशि निर्धारित की गई थी, लगभग उसी धनराशि पर दून के करोड़ों रुपये के शराब ठेकों का आवंटन कर दिया गया।
डोईवाला की विदेशी शराब की दुकान के लिए 43 लाख 45 हजार 380 रुपये निर्धारित किए गए थे, जिसकी बोली 44 लाख रुपये लगी। वही सेलाकुई के देशी शराब के ठेके के लिए 47 लाख 83 हजार रुपये निर्धारित किए गए थे।
जिसकी बोली 48 लाख रुपये लगी। इस पर भी कुछ ठेकेदारों की आपत्ति थी कि 31 अन्य लोगों के नाम बोली दाताओं की सूची से हटा दिए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि बोली के दौरान अधिकारी तीन बार बोली की रकम दोहराते रहे, लेकिन एक से अधिक ठेकेदार उसे आगे बोली लगाता नहीं दिखा। बोली के दौरान ठेकेदारों की ओर से पहले ही पुल बना लिया गया था कि फलां दुकान के लिए इससे अधिक की बोली नहीं लगेगी।
यह है नियम
सरकार शराब दुकान के लिए रेट निर्धारित किया है, एक से अधिक आवेदक आने पर इसके लिए लॉटरी निकाली जाती है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से लॉटरी न निकालकर बोली लगाकर ठेकों का आवंटन किया गया।
ऐसे बनता है पूल
किसी दुकान की बोली से पहले ठेकेदार विभागीय अधिकारियों से मिलीभगत कर आपस में पूल बना लेते हैं कि आपस में तय की गई धनराशि से अधिक की बोली नहीं लगेगी। बोली के लिए भी एक व्यक्ति के अलावा कोई अन्य हाथ खड़ा नहीं करता।
अप्रैल में लॉटरी अब बोली से हुआ आवंटन
बोली के लिए आए ठेकेदारों ने बताया कि अप्रैल में प्रशासन की ओर से लॉटरी के जरिये दून की आठ दुकानों का आवंटन किया गया। जबकि अब बोली लगाकर दुकान आवंटित की जा रही है।
37 दुकानों का आवंटन आपसी सहमति से किया गया हैं आप इसे बोली भी कह सकते हैं, रही बात अप्रैल में लॉटरी से दुकानों के आवंटन की इसकी मुझे जानकारी नहीं है मैं नया आया हूं, जिस तरह के निर्देश थे वही प्रक्रिया अपनाई गई है।
-मनोज उपाध्याय, जिला आबकारी अधिकारी