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सिडकुल की जमीन में फिर करोड़ों का खेल

Fri, 21 Mar 2014 09:14 AM IST
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 21 Mar 2014 09:14 AM IST
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fraud in sidkul land deal

उत्तराखंड के सिडकुल में जमीनों का एक और खेल में सामने आया। हीरो मोटो कार्प कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए अफसर, सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए की चपत लगाने से भी नहीं चूके।

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अफसर बात करने को भी तैयार नहीं
2006 के निर्धारित विक्रय मूल्य पर 214 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री विगत फरवरी 2014 में सिडकुल ने कंपनी केनाम कर दी। यह लगभग 250 करोड़ रुपए का फटका था।

और, रजिस्ट्री के लिए स्टांप ड्यूटी भी सात साल पुरानी दर के हिसाब से तय हुई जिससे सरकारी खजाने को 12 करोड़ की चपत लगी। इस मामले को लेकर कोई अफसर बात करने को भी तैयार नहीं है।
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इस रजिस्ट्री को कराने की जल्दबाजी उस समय दिखी जब विजय बहुगुणा के सीएम पद से हटने की चर्चा जोरों पर थी। और, हरीश रावत केसीएम बनने के 17 दिन बाद सिडकुल ने 17 फरवरी को जमीन की रजिस्ट्री करा दी।
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लीज डीड नहीं बनवाई गई
2006 में सिडकुल में हीरो होंडा कंपनी ने टू व्हीलर बनाने के लिए 214 एकड़ जमीन का करार सरकार के साथ किया। उसी दर से कुछ धनराशि जमा करा दी गई।

सरकार और कंपनी के बीच 2006 में 1000 रुपए प्रति वर्ग मीटर भूमि क्रय करने का करार हुआ लेकिन लीज डीड नहीं बनवाई गई। लीज डीड ऐसा लीगल दस्तावेज है जिसके आधार पर जमीन की रजिस्ट्री बाद में भी पुरानी दरों पर हो सकती है।

रजिस्ट्री नहीं हो सकती
इसी बीच होंडा कंपनी अलग हुई और हीरो मोटो कार्प के नाम से नई कंपनी बनी। कई साल तक मामला ठंड़ा रहा लेकिन पिछले वर्ष कंपनी ने रजिस्ट्री कराने की कसरत शुरू की। नियम है कि यदि लीज डीड नहीं है तो पुरानी दर पर रजिस्ट्री नहीं हो सकती।

मगर, फिर भी सब-रजिस्ट्रार ने 2006 की दर पर 86.69 करोड़ में जमीन की रजिस्ट्री कर वर्तमान रेट के हिसाब से 254 करोड़ रुपए का सीधा नुकसान कराया। सिडकुल हरिद्वार में वर्तमान रेट 3812 रुपए प्रति वर्ग मीटर है लेकिन फिर भी 1000 रुपए में जमीन की रजिस्ट्री हुई।

बात यहीं पर नहीं रुकी बल्कि स्टांप ड्यूटी भी 2006 के रेट के हिसाब से ली गई। वर्तमान रेट के हिसाब से 16.50 करोड़ की स्टांप ड्यूटी बनती है। लेकिन 4.50 करोड़ रुपए वसूले गए।

इस तरह से 12 करोड़ रुपए की स्टांप ड्यूटी छोड़ दी गई। जमीन के रेट और स्टांप ड्यूटी में सरकार को 266 करोड़ रुपए की हानि हुई। इस मामले में अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा से बात करने की कोशिश की गई लेकिन शाम तक उनका मोबाइल स्वीच ऑफ मिलता रहा।

एक सवाल और भी
सवाल यह है कि जहां पर यह जमीन है वहां सिडकुल का वर्तमान रेट 3812 रुपए प्रति वर्ग मीटर है और जिला प्रशासन का सर्किल रेट लगभग 8000 रुपए है। फिर भी जमीन इतनी सस्ती क्यों दे दी गई।


सिडकुल के डीजीएम की तरफ से सब-रजिस्ट्रार हरिद्वार को लिखे पत्र में ना तो जमीन की रजिस्ट्री वर्ष 2006 की दर पर करने का कहा और ना ही स्टांप ड्यूटी के कम करने की बात कही। इस मामले को शासन में बैठे कुछ बड़े अफसरों ने केवल मौखिक तौर पर अंजाम दिया।

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