कांवड़ यात्रा के लिए चार राज्यों की बैठक, हरिद्वार में बनेगा कंट्रोल रूम
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कांवड़ यात्रा में डीजे, हाकी, धारदार हथियार, गैस सिलेंडर और नशीले पदार्थ प्रतिबंधित होंगे। बिना परमिट कोई वाहन नहीं चलेगा। हरिद्वार में पुलिस का एकीकृत कंट्रोल रूम बनेगा।
इसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान के पुलिस अधिकारी समन्वय के लिए यात्रा के दौरान तैनात रहेंगे। मंगलवार सुबह देहरादून सचिवालय में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में हुई अंतर्राज्यीय समन्वय बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसके बाद दोपहर करीब तीन बजे गाजियाबाद की हरसांव पुलिस लाइंस में यूपी के प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा और डीजीपी जावीद अहमद ने समीक्षा बैठक की।
देहरादून में हुई बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि कांवड़ यात्रा जहां से शुरू हो, वहीं से नियंत्रित किया जाए तो यात्रा मार्ग और हरिद्वार में दिक्कत नहीं होगी। जिस गांव से कांवड़ यात्रा शुरू होगी, वहां के थाने में ग्रुप लीडर का नाम और मोबाइल नंबर देना होगा। दोनों बैठकों में यातायात प्रबंधन, सूचनाओं के आदान-प्रदान, जन-जागरूकता, नियमों के अनुपालन, राज्यों की सीमाओं पर संयुक्त चेकिंग आदि पर चर्चा की गई। यह भी तय हुआ कि हरियाणा, दिल्ली, यूपी, राजस्थान आदि संबंधित राज्य नोडल अधिकारी नामित करेंगे। उत्तराखंड-यूपी के अफसर नोडल अधिकारी के संपर्क में रहकर समन्वय करेंगे।
रेलवे प्लेटफार्म पर नियंत्रण के लिए जीआरपी और आरपीएफ के समन्वय से कार्य होगा। अनहोनी से बचने के लिए सभी राज्यों का खुफि या तंत्र सक्रिय रहेगा। सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए धार्मिक स्थलों की विशेष निगरानी की जाएगी। संवेदनशील स्थलों का चयन कर लिया गया है। एंबुलेंस, मेडिकल किट, रिकवरी वैन, ड्रोन कैमरे, सीसीटीवी, चॉपर आदि के इंतजाम यात्रा मार्ग पर रहेंगे।
बता दें कि 19 जुलाई से तीन अगस्त तक कांवड़ मेले का आयोजन होगा। इस साल साढ़े तीन करोड़ कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने का अनुमान है। कांवड़ियों को किसी भी हाल में मसूरी नहीं जाने दिया जाएगा। उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा नहर की पटरी पर चलती है। हाईवे आवागमन के लिए खुला रहता है। यूपी की सीमा में राष्ट्रीय राजमार्ग 24 पर यात्रा चलेगी।
हाईवे 24 जुलाई से भारी वाहनों के लिए और 27 जुलाई से सभी तरह के वाहनों के लिए बंद कर दिया जाएगा। यूपी और हरिद्वार में कांवड़ के लिए सभी इंतजाम कर लिए गए हैं। बैठक में यूपी से एडीजी दलजीत सिंह चौधरी, आईजी मेरठ सुजीत पांडेय, हरियाणा से आईजी करनाल सुभाष यादव, उत्तराखंड के प्रमुख सचिव गृह उमाकांत पंवार, डीजीपी एमए गणपति, प्रमुख सचिव खाद्य राधा रतूड़ी, सचिव परिवहन सीएच नपलच्याल, सचिव शहरी विकास डीएस गर्ब्याल आदि रहे।
शांतिपूर्वक निपटे कांवड़ यात्रा, ट्रैफिक भी रहे स्मूद
प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी ने हरसांव पुलिस लाइंस में हुई समीक्षा बैठक में कहा कि व्यवस्था इस तरह हो कि कांवड़ यात्रा शांतिपूर्वक निपटे और ट्रैफिक भी स्मूद रहे। इसके लिए अफसर और कर्मचारी रात-दिन एक कर दें।
प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा ने कहा कि कांवड़ लेने के लिए हरिद्वार में हरियाणा से करीब 30 प्रतिशत, यूपी से 27 प्रतिशत, दिल्ली और आसपास से 15 प्रतिशत जबकि राजस्थान से करीब पांच प्रतिशत कांवड़िए पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि रेलगाड़ियों में पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए ताकि छेड़छाड़ आदि कोई घटना न होने पाए।
इसके लिए डीएम और एसएसपी प्लान बनाएं और गांववालों के साथ बैठक कर उनका सहयोग लें। डीजीपी जावीद अहमद ने कहा कि 40 कंपनी पीएसी, होमगार्ड, सीआरपीएफ एटीएस, एसटीएफ के अलावा लोकल पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में रहेगी। उन्होंने कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
पुलिस की कोशिश रहेगी कि ज्यादातर लोग कांवड़ मार्ग से आएं-जाएं ताकि हाईवे पर ट्रैफिक का भार न पड़े और जनता को परेशानी न हो। इसके लिए कावंड़ियों को जागरूक किया जाएगा। जुगाड़ वाले वाहनों को कांवड़ में नहीं चलने दिया जाएगा, सिर्फ रजिस्टर्ड वाहन ही चलेंगे।
बैठक में मंडलायुक्त मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, डीएम गाजियाबाद, हरिद्वार, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, अमरोहा, हापुड़, ज्वाइंट सीपी दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड के आईजी-डीआईजी और एसएसपी आदि मौजूद रहे।
‘खतरे’ के साए में कांवड़ यात्रा
गाजियाबाद। प्रमुख सचिव और डीजीपी ने इस बारे में खुलकर तो नहीं बोला मगर पहली बार कांवड़ यात्रा की मीटिंग में एटीएस के आईजी की उपस्थिति से साफ है कि इस बार कांवड़ यात्रा अतिसंवेदनशील है और खतरे के इनपुट हैं। इससे पहले कांवड़ यात्रा में कभी एटीएस को नहीं लगाया गया है। हालांकि अफसरों का कहना है कि किसी तरह के हमले का कोई स्पेसेफिक इनपुट तो नहीं है लेकिन शासन सुरक्षा व्यवस्था में कोई कोताही बरतना नहीं चाहता है।