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कोटद्वारः सुमित पटवाल हत्याकांड में चारों आरोपी दोषी करार, फैसला सुरक्षित 

Sat, 31 Aug 2019 06:24 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 31 Aug 2019 06:24 PM IST
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Four accused convicted in kotdwar Sumit Patwal murder case
प्रतीकात्मक

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रतिभा तिवारी की अदालत ने वर्ष 2015 के बहुचर्चित सुमित पटवाल हत्याकांड के चारों आरोपियों को दोषसिद्ध करार दिया है। अदालत ने इस मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद आज फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट तीन सितंबर को सजा सुनाएगी।

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सहायक शासकीय अधिवक्ता (एडीजीसी) जितेंद्र सिंह रावत ने बताया कि 22 मार्च, 2015 को कोटद्वार के बेलाडाट चौराहे में बाइक सवार बदमाशों ने सुमित पटवाल को सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी थी। 23 मार्च को मृतक की मां सतेश्वरी देवी की ओर से मानपुर निवासी दीपक रावत पर संदेह जताते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
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मामले की जांच तत्कालीन कोतवाल प्रमोद शाह ने की थी और चार दिन के भीतर 25 मार्च को हत्याकांड का खुलासा करते हुए स्थानीय युवक दीपक रावत को गिरफ्तार कर लिया था। इसके अगले दिन हत्याकांड के मास्टर माइंड सुरेंद्र सिंह नेगी उर्फ सूरी और भाड़े के दोनों शूटरों को गिरफ्तार कर लिया था। इस मामले में पुलिस की ओर से जांच के बाद चारों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया था। 
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एडीजीसी जितेंद्र रावत ने बताया कि इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 43 गवाह न्यायालय में परीक्षित कराए गए, जिसमें से प्रत्यक्षदर्शी गवाह पक्षद्रोही घोषित कर दिए गए। दोनों शूटरों से असलहों की बरामदगी और सीसीटीवी फुटेज जैसे अन्य कई साक्ष्य इस मामले में हत्यारोपियों को दोषी सिद्ध करने में मददगार बने। अभियोजन पक्ष के अनुसार हत्याकांड का असली मास्टर माइंड सतपुली के गोकुल गांव निवासी सुरेंद्र सिंह नेगी ऊर्फ सूरी था। जिसने सुमित की हत्या के लिए रुड़की के दो युवकों को दो लाख रुपये की सुपारी दी थी।


सूरी और मृतक सुमित के बीच जमीन के लेन-देन पर विवाद चल रहा था। इस हत्याकांड में स्थानीय युवक दीपक रावत मददगार बना था। तब वह यहां राजकीय महाविद्यालय में लैब असिस्टेंट के पद पर कार्यरत था। दीपक रावत की सुमित पटवाल से दुश्मनी चल रही थी। अदालत ने इस हत्याकांड के चारों आरोपियों को आईपीसी की धारा 302 में दोषसिद्ध पाया। तीन सितंबर को उन्हें सजा के प्रश्न पर सुना जाएगा। कोर्ट ने जमानत पर चल रहे दीपक रावत को हिरासत में ले लिया है।

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