उत्तराखंड: चीड़ के पेड़ों के अवैध कटान के मामले में पूर्व डीएफओ अशोक कुमार निलंबित
- पेड़ों के अवैध कटान, छिलका गुलिया घपले में हुई कार्रवाई
- शासन ने वन मुख्यालय से किया अटैच, आदेश जारी
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उत्तराखंड शासन ने चंपावत में आरक्षित वन क्षेत्र में चीड़ के पेड़ों के अवैध कटान सहित अन्य कई अनियमितताओं के आरोपी तत्कालीन डीएफओ अशोक कुमार गुप्ता को निलंबित कर वन मुख्यालय से अटैच कर दिया है।
अशोक कुमार गुप्ता चंपावत वन प्रभाग में 2008-10 और 2012-2017 के बीच डीएफओ थे। आईएफएस एके गुप्ता इस समय देहरादून स्थित भूमि सर्वेक्षण निदेशालय में वन संरक्षक के रूप में तैनात हैं।
प्रमुख सचिव वन आनंद बर्द्धन ने निलंबन का आदेश जारी करते हुए अशोक कुमार गुप्ता को बिना अनुमति के वन मुख्यालय न छोड़ने के लिए भी कहा है। अशोक कुमार गुप्ता के खिलाफ कुछ समय पहले ही रंगदारी का एक वीडियो भी सामने आया था। इसके बाद छिलका गुलिया का एक ट्रक पकड़ा गया तो चंपावत वन प्रभाग में अवैध रूप से चीड़ के पेड़ों के काटने का मामला सामने आया।
शासन ने इस मामले में हल्द्वानी स्थित वन अनुसंधान केंद्र में तैनात तत्कालीन वन संरक्षक (अब मुख्य वन संरक्षक) संजीव चतुर्वेदी को जांच सौंपी। संजीव ने जांच करने के बाद करीब 2000 पन्नों की रिपोर्ट शासन को सौंपी। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख सचिव वन ने अशोक कुमार गुप्ता के निलंबन का आदेश जारी किया।
जांच रिपोर्ट में हुए कई हैरान करने वाले खुलासे
संजीव की जांच रिपोर्ट में भी कई हैरान करने वाले खुलासे हुए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक रिजर्व, सिविल और पंचायत वनों के साथ ही नाप भूमि के सूखे पेड़ों और खूंटाें से छिलके और गुलिया निकाली जा सकती है। जांच में सामने आया था कि गुप्ता ने अनुमति ग्राम सभा के कुछ पेड़ों को काटने की दी लेकिन पास ही के रिजर्व वन से कई पेड़ों को काटा गया। यही खेल अन्य स्थानों पर भी किया गया।
छिलका गुलिया ले जाने वाले ट्रक में 50 क्विंटल का भार दिखाया गया लेकिन इसमें करीब 80 क्विंटल भार था। हैरानी की बात यह थी कि यह ट्रक तीन वन चौकियों से पास हुआ और इसके बाद इसे पुलिस ने जब्त किया तो मामला खुला।
लीसा में घपलेबाजी का मामला एक ऑडियो से सामने आया था। इसमें एक अधिकारी 80 हजार लीसा टिन के लिए प्रति टिन तीन रुपये का कमीशन मांगते हुए सुनाई दिए। संजीव चतुर्वेदी की रिपोर्ट में कहा गया कि ये अधिकारी कोई और नहीं अशोक कुमार गुप्ता ही थे। इसके बाद शासन ने गुप्ता को प्रमुख वन संरक्षक कार्यालय से अटैच कर दिया था। संजीव की जांच रिपोर्ट में कई और अनियमितताओं के मामले भी सामने आए थे।