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गगास नदी की टूटती सांस को थामे हुए हैं जंगल
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Mon, 01 May 2017 02:18 PM IST
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रानीखेत और आसपास के कस्बों के लिए जीवनदायिनी गगास नदी को जंगल ही बचाए हुए हैं। गगास को पानी फीड करने वाले धारपानीधार एक्वीफायर(भूमिगत जलाशय) में पानी कम होने से पिछले 43 सालों में गगास का पानी तेजी से कम हुआ है लेकिन इस नदी के जल संग्रहण क्षेत्र में जंगल करीब सात प्रतिशत बढ़े हैं। ये जंगल ही हैं जो गगास के जल प्रवाह को कुछ हद तक बचाए हुए हैं। हालांकि अब जंगल की आग गगास के लिए चुनौती बन रही है।
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अल्मोड़ा में करीब 52.94 वर्ग किलोमीटर में गगास नदी का जल संग्रहण क्षेत्र है। पंतनगर विश्वविद्यालय के रिमोट सेंसिंग और 1965 की टोपोग्राफी सीट्स के अध्ययन से यह भी साफ हुआ है कि गगास के जल संग्रहण क्षेत्र में पिछले 43 सालों में वन क्षेत्र में करीब सात प्रतिशत इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों की मानें तो गगास के जल संग्रहण क्षेत्र में अन्य क्षेत्रों की तुलना में बंजर भूमि बढ़ने की बजाय घटी है। 43 साल पहले यहां बंजर जमीन करीब 26 प्रतिशत थी। अब यह घटकर 19.42 प्रतिशत रह गई है। जाहिर है कि बंजर जमीन में वन क्षेत्र का विस्तार हुआ है।
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जंगल के विस्तार से गगास का जल प्रवाह कुछ हद तक बच सका है। गगास को फीड करने वाले धारपानीधार के भूमिगत जलाशय में जल स्तर कम होने से इस नदी की कई जलधाराएं अपना अस्तित्व खो चुकी हैं। रानीखेत सहित अन्य कस्बों के करीब पचास हजार लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने वाली गगास का संकट इन सब लोगों का संकट भी बन रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक गगास में पानी की मात्रा तेजी से कम होने की एक वजह जंगल की आग भी है। गगास के ऊपरी जल संग्रहण क्षेत्र में स्थित बिंता के लोगों के मुताबिक जंगल में आग लगने से चौड़ी पत्ती के पेड़ बांज, बुरांश आदि को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंच रहा है।
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कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक बंजर जमीन में पानी को सोखने की क्षमता कम होती है, लिहाजा जमीन के बंजर होने पर भूमिगत जल के रिचार्ज होने की क्षमता भी कम हो जाती है। गगास नदी क्षेत्र में बंजर जमीन पिछले 43 साल में कम हुई है। इसका भी फायदा नदी को मिल रहा है। गगास के जल संग्रहण क्षेत्र में औसत बारिश करीब 1160 मिलीमीटर प्रति वर्ष है।
कृषि भूमि
पहले-12.610 वर्ग किलोमीटर
अब-12.446 वर्ग किलोमीटर
वन
पहले-26.240 वर्ग किलोमीटर
अब-30.268 वर्ग किलोमीटर
बंजर भूमि
पहले-14.094 वर्ग किलोमीटर
अब-10.230 वर्ग किलोमीटर