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वन अनुसंधान संस्थानों के शोध, तकनीक होगी पेटेंट
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 30 Mar 2016 01:36 PM IST
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हिमालयी इको सिस्टम, नदियों, वानिकी, जलवायु परिवर्तन, कृषि, जल संरक्षण, काष्ठ आदि क्षेत्रों में देश के भारतीय वन अनुसंधान संस्थानों के विशेष शोध और तकनीक पेटेंट होगी।
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देश और विदेशों के विज्ञानी इन संस्थानों के शोध का इस्तेमाल बिना अनुमति नहीं कर पाएंगे। अगर कोई चोरी करेगा तो उसके खिलाफ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत मुकदमा चलेगा। भारतीय वन अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) ने पहली बार बौद्धिक संपत्ति प्रबंधन नीति बनाई है।
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आईसीएफआरई के महानिदेशक डा. अश्विनी कुमार की ओर से इस संबंध में देश के सभी वन अनुसंधान संस्थानों के निदेशकों को आदेश जारी कर दिया गया कि अपने खास शोध और तकनीक को पेटेंट कराएं। गत दिवस दिल्ली में हुई परिषद की बैठक में बौद्धिक संपत्ति प्रबंधन नीति की अधिसूचना को जारी कर दिया था। इसके बाद यह आदेश जारी किया गया है। इसमें केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के विशेष सचिव डा. शरद सिंह भी मौजूद थे।
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वानिकी और इको सिस्टम से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में वन अनुसंधान संस्थानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध और तकनीक विकसित की हैं, लेकिन इन्हें पेटेंट नहीं कराया गया जिससे इनकी चोरी का खतरा रहता है। इसी के मद्देनजर आईसीएफआरई ने यह निर्णय लिया है।
परिषद ने वैज्ञानिक शोधों में आइडिया चोरी पर अंकुश लगाने के लिए ‘एंटी प्लेगियरिज्म पॉलिसी’ बना दी है। अब विज्ञानी दो-तीन आइडिया को मिलाकर नया बिंदु तैयार करने जैसा शोध में घपला नहीं कर पाएंगे। परिषद के उप महानिदेशक डा. एस. दास गुप्ता का कहना कि इस पॉलिसी से अनुसंधान का अच्छा माहौल बनेगा। नीतियों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।