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घुरड़ शिकार मामले की जांच को त्यूणी पहुंची वन विभाग की टीम
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त्यूणी। दो मादा घुरड़ के शिकार मामले की जांच के लिए त्यूणी पहुंची वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का दौरा किया। इस दौरान टीम ने शिकार किए जाने वाले स्थल से साक्ष्य एकत्रित करने के साथ त्यूणी थाने में पुलिस के माध्यम से की गई कार्रवाई और आरोपियों को थाने से ही जमानत देने संबंधी जानकारी ली। टीम में शामिल अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच करके शीघ्र ही विस्तृत रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
त्यूणी पुलिस की पकड़ में आए दो मादा घुरड़ (हिरन की एक प्रजाति) के शिकार मामले की वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है। त्यूणी पुलिस ने शिकार के आरोप में हिमाचल प्रदेश के जनपद शिमला के रहने वाले पांच शिकारियों को पकड़कर उनकी कारों से दो मृत घुरड़ बरामद किए थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक टेलिस्कोप लगी रायफल और दस कारतूस भी बरामद करने का दावा किया था, लेकिन मामला संदेहास्पद तब हुआ जब नाटकीय अंदाज में पुलिस ने सभी आरोपियों को थाने से जमानत पर छोड़ दिया। मामले में वाइल्ड लाइफ चीफ ने एक्शन लेते हुए विभाग के अधिकारियों को न सिर्फ शिकार की पूरी घटना की जांच के आदेश दिए बल्कि त्यूणी पुलिस की कार्रवाई से पुलिस के अधिकारियों को लिखित में अवगत कराने के लिए कहा। इसी क्रम में चीफ कंजरवेटर डॉ. धीरज पांडेय के दिशा-निर्देशन में चकराता वन प्रभाग की डीएफओ कल्याणी व टोंस वन प्रभाग के डीएफओ एसके काला ने शिकार होने वाले स्थान का मौका मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने त्यूणी पुलिस से भी घटना व आरोपियों के संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी ली। टीम के सदस्य एसके काला ने बताया कि पुलिस के माध्यम से की गई कार्रवाई संदेहास्पद है। इस प्रकार के गंभीर मामलों में थाने से जमानत देने के बजाय आरोपियों को संबंधित न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मृत घुरड़ का विसरा भी पुलिस के माध्यम से अभी तक वाइल्ड लाइफ को नहीं भेजा गया है। इसके बारे में भी पुलिस अधिकारियों से जानकारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच की रिपोर्ट शीघ्र ही वन विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
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त्यूणी पुलिस की पकड़ में आए दो मादा घुरड़ (हिरन की एक प्रजाति) के शिकार मामले की वन विभाग ने जांच शुरू कर दी है। त्यूणी पुलिस ने शिकार के आरोप में हिमाचल प्रदेश के जनपद शिमला के रहने वाले पांच शिकारियों को पकड़कर उनकी कारों से दो मृत घुरड़ बरामद किए थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक टेलिस्कोप लगी रायफल और दस कारतूस भी बरामद करने का दावा किया था, लेकिन मामला संदेहास्पद तब हुआ जब नाटकीय अंदाज में पुलिस ने सभी आरोपियों को थाने से जमानत पर छोड़ दिया। मामले में वाइल्ड लाइफ चीफ ने एक्शन लेते हुए विभाग के अधिकारियों को न सिर्फ शिकार की पूरी घटना की जांच के आदेश दिए बल्कि त्यूणी पुलिस की कार्रवाई से पुलिस के अधिकारियों को लिखित में अवगत कराने के लिए कहा। इसी क्रम में चीफ कंजरवेटर डॉ. धीरज पांडेय के दिशा-निर्देशन में चकराता वन प्रभाग की डीएफओ कल्याणी व टोंस वन प्रभाग के डीएफओ एसके काला ने शिकार होने वाले स्थान का मौका मुआयना किया। इस दौरान उन्होंने त्यूणी पुलिस से भी घटना व आरोपियों के संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी ली। टीम के सदस्य एसके काला ने बताया कि पुलिस के माध्यम से की गई कार्रवाई संदेहास्पद है। इस प्रकार के गंभीर मामलों में थाने से जमानत देने के बजाय आरोपियों को संबंधित न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मृत घुरड़ का विसरा भी पुलिस के माध्यम से अभी तक वाइल्ड लाइफ को नहीं भेजा गया है। इसके बारे में भी पुलिस अधिकारियों से जानकारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच की रिपोर्ट शीघ्र ही वन विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
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