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उत्तराखंड के राज्य खेल को बनाया 'फुटबॉल'

Wed, 09 Oct 2013 08:47 AM IST
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून
अंशुल डांगी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 09 Oct 2013 08:47 AM IST
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football association fight with each other

2011 में फुटबॉल को उत्तराखंड के राज्य खेल का दर्जा मिला, लेकिन आज तक राज्य में कोई स्टेट लीग और कोई राष्ट्रीय टूर्नामेंट नहीं हुआ है।

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सरकार से लेकर खेल एसोसिएशनों तक ने राज्य खेल को फुट-बॉल बना दिया है। पैरों से गेंद को इधर से उधर तो किया जा रहा है लेकिन न तो मैदान है और न ही आज तक कोई राष्ट्रीय खिताब मिल पाया है। फुटबॉल एसोसिएशनों की आपसी लड़ाई में खेल हाशिए पर चला गया है।
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2011 में दिया राज्य खेल का दर्जा
भाजपा शासनकाल में खेल विभाग ने 2011 में फुटबॉल को राज्य खेल का दर्जा तो दे दिया लेकिन इसकी बेहतरी के लिए कुछ नहीं किया। राज्य खेल का दर्जा देते समय इसके अतीत को ध्यान में रखा गया था लेकिन राज्य बनने के बाद से इसका स्वर्णिम अतीत केवल यादें बनकर रहा गया है।
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हालत यह है कि संतोष ट्रॉफी में प्रदेश की टीम अब तक ग्रुप मैच से आगे नहीं बढ़ी है। स्कूल स्तर पर होने वाले सुब्रतो कप सहित अन्य प्रतियोगिताओं से टीम बाहर है। इस साल अगस्त में शिक्षा विभाग की तरफ से आयोजित प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में राज्य से केवल तीन स्कूली टीमें पहुंची थी।

स्टेट एसोसिएशन और जिला एसोसिएशन में झगड़ा बढ़ता जा रहा है। एआईएफएफ की गाइडलाइन के अनुसार राज्य में हर साल स्टेट लीग होनी चाहिए। राज्य के 70 फीसदी जिलों में जिला फुटबॉल एसोसिएशन और हर जिले में 6 रजिस्टर्ड क्लब होने चाहिए। मगर आज तक न तो राज्य में स्टेट लीग हो सकी है और न ही हर जिले में एसोसिएशन बनी है।

इसलिए बना राज्य खेल
सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी पर उप खेल निदेशक और लोक सूचना अधिकारी अजय अग्रवाल ने बताया है कि खेल विभाग का कहना है कि राज्य में फुटबॉल सबसे लोकप्रिय और प्रचलित खेल है। इस खेल से राज्य से कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकले हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य के फुटबॉल खिलाड़ियों ने कई पदक देश को दिलाए हैं। फुटबॉलरों के इसी प्रदर्शन को देखते हुए उत्तराखंड में फुटबॉल को राज्य खेल घोषित किया गया है।


फुटबॉल को राज्य खेल का दर्जा देना अच्छा है। लेकिन इस खेल की मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाना जरूरी है। आज प्रदेश में न तो इंफ्रास्ट्रचर है और न ही सुविधाएं। खेलने के लिए मैदान नहीं हैं, तो खिलाड़ी कैसे आगे बढ़ेंगे?
- अमर बहादुर गुरुंग, पूर्व खिलाड़ी

फुटबॉल को राज्य खेल बनाना सही है, लेकिन सुविधाएं भी देनी चाहिए। हमारे पास न तो मैदान हैं और न ही अन्य सुविधाएं। एसोसिएशनों के बीच अहम की लड़ाई ने खेल के स्तर को गिराया है। पवेलियन मैदान भी दो साल बाद खुला है, लेकिन सिर्फ तीन दिन ही मिलेगा। ऐसे तो यहां टूर्नामेंट होना मुश्किल है।
- गुरुचरण सिंह, पूर्व खिलाड़ी

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