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'खतरे' में है खाद्य सुरक्षा योजना
अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 10 Sep 2013 12:08 PM IST
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खाद्य सुरक्षा कानून को प्रदेश में अमली जामा पहनाना सरकार के लिए आसान काम नही दिख रहा है। खाद्य सुरक्षा कानून को अमली जामा राज्य सरकार को छह माह के अंदर-अंदर पहनाना है।
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प्रदेश में बुरी तरह से चरमराई पीडीएस व्यव्सथा को इन छह महीनों में ही सरकार को पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत कर पारदर्शी बनाना होगा। इसके साथ ही यह भी पहचान करनी है कि किसको इस योजना का लाभ दिया जाना है कि और किसको नहीं। मुसीबत यह भी है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में यह काम और भी मतुश्किल होगा।
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प्रदेश में करीब 24 लाख राशन कार्ड धारक हैं। इसमें से छह लाख परिवार बीपीएल के हैं। ऐसे में प्रदेश सरकार को पहले तो यह ही तय करना होगा कि किसको छोड़ा और किसको शामिल किया जाए। फिर यह वितरण आखिकार राशन की दुकानों के जरिए ही होना है।
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जाहिर है कि इन दुकानों को न सिर्फ कम्प्यूटरीकृत करना है बल्कि इन्हें ऑनलाइन भी करना होगा। इसमें प्रदेश के राशन विक्रेताओं को प्रशिक्षित करने की चुनौती भी है। खाद्यान्न वितरण के साथ ही भंडारण की क्षमता बढ़ाना भी प्रदेश सरकार की दूसरी चिंता में शामिल होगा।
क्या है खाद्य सुरक्षा कानून
अंत्योदय अन्न योजना में शामिल परिवारों को माह में 35 किलो से कम अनाज नहीं। बाकी सभी पात्र परिवारों को पांच किलो प्रति व्यक्ति के हिसाब से राशन। इसमें तीन रुपए प्रति किलोग्राम गेंहू और दो रुपए प्रति किलो चावल दिया जाएगा।
कौन होंगे पात्र
अभी यह तय होना बाकी है। यह तय भी राज्य सरकार को करना है। ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 50 प्रतिशत लोगों का इसका लाभ दिया जा सकेगा। हालांकि प्रदेश सरकार का कहना है कि इस योजना के दायरे में विस्तार किया जाएगा।
क्या होना बाकी है
पीडीएस सुधार-घर के दरवाजे तक अनाज पहुंचाना
पूरी तरह से कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था, हर स्तर पर पूरी तरह से पारदर्शी व्यवस्था
योजना में अन्य अनाज भी शामिल करना
खाद्यान्न सुरक्षा के साथ ही लाभार्थियों को फूड कूपन, कैश ट्रांसफर आदि का लाभ देना
शिकायतों के निवारण के लिए कॉल सेंटर, हैल्पलाइन, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति आदि
हर जिले में एक शिकायत निवारण अधिकारी
राज्य खाद्य आयोग का गठन
परिवार की मुखिया महिला होगी, राशन कार्ड महिला के नाम पर होगा
पीडीएस प्रणाली को आधार कार्ड से जोड़ना
कब से मिलेगा अनाज
प्रदेश सरकार इस कानून को 20 अगस्त को लागू कर चुकी है। पर कानून को लागू करने के बाद 180 दिन का समय अधिनियम में राज्य सरकार को तैयारी के लिए दिया गया है।
इस हिसाब से प्रदेश में 20 फरवरी 2014 तक प्रदेश सरकार को हर हाल में इस कानून को अमली जामा पहनाना होगा। इतने समय में उसे लाभार्थी परिवारों की सूची तैयार कर केंद्र को देनी होगी।
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