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फोटो,, देवत्व प्रकट करता है हिमालय का लोक संगीत: प्रीतम भरतवाण
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ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय संगीत शिक्षक प्रतिभा सम्मान समार?
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जागर सम्राट पद्मश्री डॉ. प्रीतम भरतवाण ने कहा कि हिमालय का लोक संगीत देवत्व प्रकट करता है। इसमें इतनी शक्ति है कि यह अंत:चेतना को जागृत कर देवत्व को जगा देता है।
शुक्रवार को ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय संगीत शिक्षक प्रतिभा सम्मान समारोह की बतौर मुख्य अतिथि शुरूआत करते हुए प्रीतम भरतवाण ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि छात्रों में संगीत के प्रति रूचि पैदा करते हुए एक वातावरण का निर्माण किया जाना चाहिए। लोक गीत और संगीत पर आधारित डिप्लोमा कोर्स आयोजित किए जाने चाहिए। महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी ने कहा कि शिक्षकों को एक बेहतरीन मंच प्रदान करना इस कार्यक्रम का उद्देश्य है। इससे परंपराएं जीवंत रहेंगी।
निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखंड आरके कुंवर ने कहा कि संगीत की प्रतिभा जन्मजात होती है। जिसे लगातार अभ्यास के द्वारा निखारा जाता है। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार कैप्टन हिमांशु धूलिया और ब्रिगेडियर ओपी सोनी ने नई शिक्षा नीति 2020 में संस्कृति और कला के संरक्षण पर विशेष बल दिए जाने का उल्लेख किया। निदेशक प्रारंभिक शिक्षा वंदना गर्ब्याल ने कहा कि यह कार्यक्रम विद्यालय स्तर से राज्य स्तर तक विभिन्न चरणों में सम्पन्न होता है। निदेशक माध्यमिक शिक्षा सीमा जौनसारी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
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उद्घाटन सत्र में कार्यक्रम की संयोजक डॉ. उषा कटियार ने प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि देते हुए राम का गुणगान करिए भजन प्रस्तुत किया।
दो दिवसीय इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के सभी जिलों से कुल 38 शिक्षक भाग ले रहे हैं। प्रथम दिन गायन और वादन प्रस्तुत किए गए। दूसरे दिन नृत्य पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाने हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहन बिष्ट ने किया। इस अवसर पर अपर निदेशक रामकृष्ण उनियाल, संयुक्त निदेशक कंचन देवराड़ी, विभागाध्यक्ष प्रदीप रावत, उप निदेशक राय सिंह रावत, विभागाध्यक्ष सीमैट विनोद ढौंडियाल, सहायक निदेशक एस.सी.ई.आर.टी. अनीता द्विवेदी, प्रवक्ता देवराज राणा, डॉ. राकेश गैरोला, डॉ. रमेश पन्त शिव प्रकाश वर्मा, डॉ. उमेश चमोला, डॉ. अंकित जोशी, अपर निदेशक एससीईआरटीई डॉ. आरडी शर्मा, स्टाफ ऑफिसर समग्र शिक्षा बीपी मंडोली आदि उपस्थित रहे।
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शुक्रवार को ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय संगीत शिक्षक प्रतिभा सम्मान समारोह की बतौर मुख्य अतिथि शुरूआत करते हुए प्रीतम भरतवाण ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि छात्रों में संगीत के प्रति रूचि पैदा करते हुए एक वातावरण का निर्माण किया जाना चाहिए। लोक गीत और संगीत पर आधारित डिप्लोमा कोर्स आयोजित किए जाने चाहिए। महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा बंशीधर तिवारी ने कहा कि शिक्षकों को एक बेहतरीन मंच प्रदान करना इस कार्यक्रम का उद्देश्य है। इससे परंपराएं जीवंत रहेंगी।
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निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखंड आरके कुंवर ने कहा कि संगीत की प्रतिभा जन्मजात होती है। जिसे लगातार अभ्यास के द्वारा निखारा जाता है। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार कैप्टन हिमांशु धूलिया और ब्रिगेडियर ओपी सोनी ने नई शिक्षा नीति 2020 में संस्कृति और कला के संरक्षण पर विशेष बल दिए जाने का उल्लेख किया। निदेशक प्रारंभिक शिक्षा वंदना गर्ब्याल ने कहा कि यह कार्यक्रम विद्यालय स्तर से राज्य स्तर तक विभिन्न चरणों में सम्पन्न होता है। निदेशक माध्यमिक शिक्षा सीमा जौनसारी ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
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उद्घाटन सत्र में कार्यक्रम की संयोजक डॉ. उषा कटियार ने प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि देते हुए राम का गुणगान करिए भजन प्रस्तुत किया।
दो दिवसीय इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के सभी जिलों से कुल 38 शिक्षक भाग ले रहे हैं। प्रथम दिन गायन और वादन प्रस्तुत किए गए। दूसरे दिन नृत्य पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाने हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मोहन बिष्ट ने किया। इस अवसर पर अपर निदेशक रामकृष्ण उनियाल, संयुक्त निदेशक कंचन देवराड़ी, विभागाध्यक्ष प्रदीप रावत, उप निदेशक राय सिंह रावत, विभागाध्यक्ष सीमैट विनोद ढौंडियाल, सहायक निदेशक एस.सी.ई.आर.टी. अनीता द्विवेदी, प्रवक्ता देवराज राणा, डॉ. राकेश गैरोला, डॉ. रमेश पन्त शिव प्रकाश वर्मा, डॉ. उमेश चमोला, डॉ. अंकित जोशी, अपर निदेशक एससीईआरटीई डॉ. आरडी शर्मा, स्टाफ ऑफिसर समग्र शिक्षा बीपी मंडोली आदि उपस्थित रहे।