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जलवायु परिवर्तन के चलते पहले ही महकने, खिलने लगे फूल

Wed, 06 Jul 2022 12:33 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 06 Jul 2022 12:33 AM IST
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Flowers already smelling, blooming due to climate change
भारत समेत पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन का जहां कई रूपों में व्यापक असर दिखाई दे रहा है, वहीं अब वनस्पतियों पर भी असर साफ दिखने लगा है। जलवायु परिवर्तन के चलते ही अब अपने तय समय से पहले ही जहां फूल खिलने लगे हैं, वहीं महक भी बिखेर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि उत्तराखंड में ब्रह्म कमल तय समय से पूर्व खिलने लगे हैं, वहीं फूलों की घाटी में भी समय से पहले फूल खिलने लगे हैं।
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भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों की मानें तो जलवायु परिवर्तन का असर जहां कई रूपों में पूरी दुनिया में दिखाई दे रहा, वहीं, भारत जलवायु परिवर्तन के असर से फूलों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। पूरी दुनिया में साढ़े चार लाख ऐसी वनस्पतियां पाई जाती हैं, जिसमें फूल खिलते हैं। भारत में 40,000 प्रजातियों की वनस्पतियां पाई जाती हैं, जिसमें से 20 हजार प्रजातियां ऐसी हैं, जिसमें फूल खिलते हैं। फूलों के खिलने का एक समय भी निर्धारित होता है। निश्चित तापमान और वातावरण में ही फूलों के खिलने की प्रक्रिया शुरू होती है। भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में ऋतुओें के हिसाब से अलग-अलग प्रजातियों के फूल अलग-अलग क्षेत्रों में खिलते हैं।
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वनस्पति विज्ञानियों के मुताबिक, देश में बसंत ऋतु में फूलों की हजारों प्रजातियों के फूल खिलते हैं, जो बसंत के आगमन का भी संदेश देते हैं, लेकिन अब जलवायु परिवर्तन के असर से फूलों के खिलने के समय में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड की बात करें तो राज्य की उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला राज्य पुष्प ब्रह्म कमल भी अब निर्धारित समय से पहले खिलने लगा है। वहीं फूलों की घाटी में भी समय से पहले फूल खिलने की बातें सामने आ रही हैं। भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह के मुताबिक, न सिर्फ उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों एवं देश के तमाम हिमालयी राज्यों में अलग-अलग प्रजातियों के फूलों के खिलने के समय में बदलाव देखने को मिल रहा है।
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जलवायु परिवर्तन से फूलों के रंगों में भी बदलाव
जलवायु परिवर्तन और तापमान में बढ़ोतरी से अब फूलों के रंगों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकन साइंस जर्नल करेंट बायोलॉजी में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया कि फूलों के पिगमेंट में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। पिगमेंट पंखुड़ियों में पाए जाने वाला ऐसा पदार्थ है, जो पराबैगनी किरणों को अवशोषित करता है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध में यह बात भी सामने आई कि पराबैंगनी किरणों का सबसे अधिक असर उच्च हिमालयी क्षेत्रों के साथ ही दुनिया के तमाम पर्वतीय इलाकों में पाए जाने वाले फूलों पर ज्यादा देखने को मिल रहा है। शोध में यह बात सामने आई कि दुनिया में अत्यधिक कार्बन उत्सर्जन से ओजोन परत के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी होने और अधिक अल्ट्रावायलेट किरणों के धरती पर आने से फूलों के परागकणों पर भी असर पड़ा है, जिससे फूलों के खिलने के समय में बदलाव के साथ ही रंगों में भी बदलाव देखने को मिला है।

पिछले कई दशकों में जिस तरह से भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में जलवायु परिवर्तन में बदलाव देखने को मिल रहा, उसका असर इंसानों, वन्यजीवों के साथ ही वनस्पतियों पर भी दिखाई दे रहा है। भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में वनस्पतियों और फूलों की लाखों प्रजातियों में तमाम बदलाव देखने को मिल रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के असर से न सिर्फ फूल निर्धारित समय से पहले खिलने लगे हैं, बल्कि उनके रंगों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।
- डॉ. एसके सिंह, क्षेत्रीय प्रभारी, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण
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