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राजभवन में खिला है फूलों का संसार
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 22 Feb 2014 01:02 AM IST
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राजभवन में दो दिवसीय वसंतोत्सव (पुष्प प्रदर्शनी) शनिवार 22 फरवरी से प्रारंभ हो रही है। प्रदर्शनी में कोई भी आम नागरिक वसंती बहार के नजारे देख सकता है। इस दौरान राजभवन में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी।
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राज्यपाल ने दी जानकारी
राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी ने राजभवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में वसंतोत्सव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राजभवन में हर साल आयोजित होने वाली इस प्रदर्शनी को आम जनता के बीच लोकप्रिय, आकर्षक एवं सार्थक बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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सम्मान का प्रतीक माने जाने वाले पुष्प राग-द्वेष, तनाव और क्रोध को कम करते हैं। उन्होंने कहा कि पुष्प प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल प्रदर्शनी नहीं, बल्कि इससे जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।
फूलों से रोजगार के अवसर
पुष्पप्रेमियों और जनसामान्य में सौहार्दपूर्ण वातावरण के निर्माण के साथ छोटे और सीमांत किसानों के लिए आजीविका के नए अवसर मुहैया कराने के भी इस दौरान प्रयास किए जाएंगे।
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राज्यपाल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में फूलों की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्तराखंड में फूलों की खेती बढ़ रही है। राज्य गठन के समय 150 हेक्टेअर क्षेत्रफल में होने वाली फूलों की खेती अब 1550 हेक्टेअर में हो रही है।
ये होंगी प्रतियोगिताएं
पुष्प प्रदर्शनी से जुड़ी फोटोग्राफी, फूलों की पंखुड़ियों की रंगोली, स्कूली बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता। प्रतियोगिता में व्यावसायिक पुष्प उत्पादक, सरकारी संस्थानों के अतिरिक्त व्यक्तिगत एवं गैर सरकारी संस्थानों के पुष्प उत्पादक प्रतिभाग करेंगे।
लोकनृत्यों की बिखरेगी छटा
राजभवन में सुबह 11 बजे शाम पांच बजे तक जौनसारी एवं छोलिया नृत्य, मंगलाचरण, बसंत नृत्य, हिलयात्रा, मयूर नृत्य, बरामासा, होली नृत्य आयोजित होंगे।
वसंतोत्सव 2014 की थीम है घिंघारू
वसंतोत्सव में राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी भारतीय डाक तार विभाग द्वारा तैयार विशेष आवरण का विमोचन करेंगे। इसमें उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पाये जाने वाले औषधीय गुणों से भरपूर झाड़ीनुमा पौधे केदारपत्री को दर्शाया गया है। इसके पत्ते कस्तूरी मृग का प्रमुख आहर माने जाते हैं।
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वहीं इस बार वसंतोत्सव 2014 की थीम घिंघारू है। घिंघारु मध्य हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में बहुतायत में पाया जाता है। छह से 15 फीट ऊंचा, कंटीली झाड़ी वाला यह पौधा तीन से साढ़े छह हजार फीट की ऊंचाई वाले जंगलों में भी मिलता है।
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इसके फलों में उपस्थित एंटी ऑक्सीडेंट्स उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करते हैं। इसकी पत्तियों को चाय के रूप में भी प्रयोग में लाया जाता है।