जमीन देने वालों को उत्तराखंड सरकार ने दिया बड़ा अधिकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड सरकार की किसी भी जनकल्याणकारी योजना के लिए जमीन देने वालों को अब उसके फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) के मुताबिक निर्माण का अधिकार मिलेगा।
इस अधिकार का प्रयोग भूस्वामी प्राधिकरण क्षेत्र की किसी भी अन्य संपत्ति पर कर सकेगा। भूस्वामी चाहे तो निर्माण के इस अधिकार को किसी अन्य को बेच भी सकेगा।
एमडीडीए की ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट योजना के तहत कोई भी व्यक्ति सरकार को अपनी जमीन दे सकता है। इसके बदले सरकार भूस्वामी की पैसे नहीं देगी। दी गई जमीन के एफएआर के बराबर निर्माण का अधिकार देगी। इसके लिए भूस्वामी को एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
भूस्वामी चाहे तो इस प्रमाण पत्र के आधार पर निर्धारित एफएआर की अपनी संपत्ति में इस्तेमाल करे या इसे किसी अन्य को बेच दे। इस अधिकार का प्रयोग केवल एक बार किया जा सकेगा। एमडीडीए ने इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है। भविष्य में अन्य विभागों में भी योजना को लागू किया जा सकता है।
क्या है फ्लोर एरिया रेशियो
फ्लोर एरिया रेशियो किसी भी प्लॉट में कवर होने वाला एरिया है। प्लॉट एरिया गुणा एफएआर के फार्मूले से कुल कवर एरिया की गणना की जाती है।
उदाहरण के लिए सौ वर्ग फीट के किसी प्लॉट में अधिकतम कवर एरिया 75 फीसदी और अनुमन्य एफएआर 1.80 है। ऐसे में उसे प्लॉट में अधिकतम 100 गुणा 1.8 यानी 180 वर्ग फीट ही निर्माण किया जा सकता है। एफएआर की गणना सड़क की चौड़ाई, प्लॉट साइज और लैंड यूज के आधार पर होती है।
भूमि अधिग्रहण की दिक्कतें
अभी तक किसी भी सरकारी योजना के लिए सरकार भूस्वामी से जमीन लेती है। इसमें स्पेशल लैंड एक्यूजेशन अफसर सर्किल रेट के आधार पर जमीन का मूल्य निर्धारित करता है। इसके बाद संबंधित भूस्वामी को जमीन का पैसा दिया जाता है। यह प्रक्रिया बेहद लंबी और जटिल है। इसमें कई बार कई-कई साल का समय लग जाता है।
अलग-अलग कैटेगरी में इस्तेमाल
प्रस्ताव में शहर को जनसंख्या घनत्व के आधार पर ए, बी, सी और डी कैटेगरी में बांटा गया है। ए श्रेणी में जमीन देने वाला बी, सी या डी कैटेगरी वाले इलाके में ही अपने अधिकार का प्रयोग कर सकेगा। इसी तरह बी और सी वाले भी अगली कैटेगरी में ही निर्माण कर सकेंगे। अधिक जनसंख्या वाले इलाकों में निर्माण नहीं हो सकेगा।
एमडीडीए की ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट योजना से एक तरह जहां सरकारी योजनाओं के लिए लोग स्वेच्छा से जमीन देंगे, वहीं उन्हें भी अधिक फायदा मिलेगा। शहर के ज्यादा जनसंख्या घनत्व वाले क्षेत्रों से भीड़ भी कम होगी और नए इलाके विकसित होंगे।
- आर मीनाक्षी सुंदरम, उपाध्यक्ष, एमडीडीए