16 साल का राज्य और बंगला कब्जाए बैठे हैं पांच-पांच पूर्व CM
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के छह पूर्व मुख्यमंत्रियों को दो माह के अंदर सरकारी बंगला खाली करने का जो निर्देश दिया है, उसकी आंच उत्तराखंड तक भी पहुंच सकती है। उत्तराखंड में भी कई पूर्व मुख्यमंत्री सरकारी बंगले पर काबिज हैं।
पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगले पर काबिज होने को लेकर यहां पर भी कई बार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। मामले में शासन स्तर से कहा जा रहा है कि फैसला उत्तर प्रदेश को लेकर है, इस बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं है।
गौरतलब है कि यूपी सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला दिया जाए। 2004 में एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी थी। एनजीओ ने तर्क दिया था कि अगर पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला दिया गया तो इसका असर अन्य राज्यों पर भी पड़ेगा।
SC के आदेश के बाद उत्तराखंड में भी हलचल
कोर्ट ने इस मामले में दो माह के अंदर यूपी के मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करने का निर्देश दिया है। उत्तराखंड में भी समय-समय पर इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाती रही है। जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी, बीसी खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी, रमेश पोखरियाल निशंक और विजय बहुगुणा सरकारी आवास पर काबिज हैं।
यूपी को लेकर कोर्ट का जो फैसला आया है, उसमें एनडी तिवारी का नाम भी शामिल है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों में से बीसी खंडूड़ी, भगत सिंह कोश्यारी और रमेश पोखरियाल निशंक वर्तमान में सांसद हैं और इनको दिल्ली में भी आवास मिला हुआ है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है। कोर्ट का यह आदेश उत्तराखंड के लिए भी नजीर बन सकता है।
कोर्ट के आदेश की पूरी जानकारी नहीं है। अगर उत्तराखंड को लेकर कोर्ट का कोई ऐसा आदेश आता है तो उसे न्याय विभाग को भेजा जाएगा। इसके बाद कैबिनेट इस पर फैसला करेगा। फिलहाल उत्तराखंड को लेकर ऐसे किसी आदेश की जानकारी नहीं है।
-सीएस नपलच्याल, सचिव, राज्य संपत्ति