उत्तराखंड में ये जगह होगी तीन देशों की वर्ल्ड हेरिटेज
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कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग एशिया का पहला ट्रांस-बाउंड्री वर्ल्ड हेरिटेज बनेगा। देहरादून स्थित यूनेस्को सेंटर ने इसके लिए हरी झंडी दे दी है।
भारत, चीन और नेपाल के बीच बनने वाला यह यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज एक और मामले में अनोखा रहेगा। यह एशिया का पहला मिश्रित वर्ल्ड हेरिटेज भी होगा, जिसमें तीन देशों की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशिष्टता की साझेदारी है। वर्ल्ड हेरिटेज बनने से यहां विदेशी सैलानियों की संख्या बढ़ेगी। कारोबार बढ़ेगा जिससे पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
कैलास मानसरोवर क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा संरक्षण, क्षेत्रीय विकास आदि पर भारत, चीन और नेपाल ‘कैलास मानसरोवर ट्रांस-बाउंड्री लैंड स्केप एंड डेवलपमेंटल इनीशिएटिव’ योजना के तहत पहले से ही काम कर रहे हैं। इस योजना का पहला चरण पूरा हो चुका है। इसके साथ ही यात्रा मार्ग को वर्ल्ड हेरिटेज बनाने की योजना तैयार की गई।
यात्रा मार्ग के पड़ावों के रोड मैप पर काम शुरू
एशियाई देशों के लिए काम करने वाली नेपाल स्थित अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटीग्रेटेड सेंटर फॉर माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीएमएडी) ने दून स्थित यूनेस्को सेंटर फॉर वर्ल्ड नेचरल हेरिटेज फॉर मैनेजमेंट एंड ट्रेनिंग को कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग को ट्रांस-बाउंड्री वर्ल्ड हेरिटेज बनाए जाने का प्रस्ताव दिया। इस पर सेंटर ने हरी झंडी दे दी।
बता दें कि भारतीय वन्य जीव संस्थान में यूनेस्को ने विश्व का अपना पहला सेंटर खोला है। यह सेंटर एशिया-पैसिफिक देशों में वर्ल्ड हेरिटेज को चिह्नित करने के लिए काम कर रहा है। सेंटर की हरी झंडी मिलने के बाद कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग के पड़ावों के रोड मैप पर काम शुरू हो गया है।
- तीन देशों के बीच बनने वाला यह एशिया का पहला ट्रांस बाउंड्री वर्ल्ड हेरिटेज होगा। साथ ही इसमें प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों विरासत शामिल हैं। अभी तक यूनेस्को की सूची में प्राकृतिक वर्ल्ड हेरिटेज हैं या फिर सांस्कृतिक। यह एशिया का पहला मिश्रित वर्ल्ड हेरीटेज होगा।
- डॉ. वीबी माथुर, निदेशक यूनेस्को सेंटर एवं भारतीय वन्य जीव संस्थान