गूगल करेगा जेल में हुए खूनी गैंगवार की जांच
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रुड़की जेल परिसर में हुए गैंगवार की जांच अब गूगल भी करेगा। गूगल के जरिये सर्च कर जेल के अंदर से प्रयोग किए गए मोबाइल और हत्यारों के फोन का मैप तैयार होगा।
जिससे शूटरों के भागने की लोकेशन का पूरा ब्योरा जुटाया जाएगा। जेल के अंदर मोबाइल फोन की संलिप्तता का भी खुलासा होगा। जिससे पूरी साजिश का पर्दाफाश होगा।
तीन साल पहले 12 सितंबर 2011 को रुड़की उप कारागार के डिप्टी जेलर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड की जांच के लिए मोबाइल फोन की लोकेशन को गूगल से सर्च किया गया था।
गूगल मैप देगा सटीक जानकारी
किस-किस जगह मोबाइल का इस्तेमाल हुआ बदमाश किस रास्ते से आए थे, कहां ठहरे थे और कहां भागे थे। इस का पता गूगल से तैयार किए गए मैप से पता चला था।
इस बार भी कुछ ऐसा ही है। जेल के अंदर से मोबाइल फोन के जरिए बदमाशों को पूरी सटीक जानकारी तो नहीं दी गई थी। पुलिस को पक्का यकीन है कि जेल के अंदर से सटीक सूचना के बाद ही इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया गया।
यह देखते हुए पुलिस इस बार भी गूगल के जरिये मोबाइल का मैप तैयार करेगी। जिससे मोबाइल की संलिप्ता और शूटरों की लोकेशन की जानकारी सेटेलाइट के जरिए गुगल से तैयार होगी।
एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने बताया कि गूगल के जरिये पूरे मामले का मैप तैयार होगा।
व्हाट्स अप पर रची गैंगवार की साजिश
रुड़की उप कारागार के बाहर खूनखराबे की पूरी साजिश ऑनलाइन मैसेंजर व्हाट्स अप पर रची गई थी। सर्विलांस में महारत हासिल कर चुकी पुलिस के पास अभी इस तकनीक की काट मौजूद नहीं है।
इस बात से शातिर अपराधी भी वाकिफ हैं। यही वजह है कि अब अपराधों को अंजाम देने में वे इस मैसेंजर का ही इस्तेमाल करने लगे हैं। हालांकि, उत्तराखंड में इस तरह का यह पहला मामला है।
जुर्म के मास्टरमाइंड पुलिस की हर हाईटेक तकनीक से आगे हैं। स्वचालित हथियार हों या हवा से बात करने वाले वाहन, पुलिस पीछे ही रहती है।
हालांकि सर्विलांस के जरिये जरूर पुलिस कई मामलों में अपराधियों पर भारी पड़ने लगी थी। लेकिन अब ऑनलाइन मैसेंजर उनका हथियार बनने लगा है।
जेल प्रशासन कर रहा लापरवाही
रुड़की में गैंगवार के बाद जब्त किए गए तीन मोबाइल फोन से यह खुलासा हुआ है। अब इन मोबाइल फोन से पूरा डाटा निकाला जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक अब तक यह स्पष्ट हो चुका है कि इन मोबाइल फोन से जेल के अंदर से बाहर बैठे बदमाशों को चीनू पंडित की पल-पल की खबर पहुंचाई जा रही थी। अब इस मैसेंजर के जरिये ही फरार हुए बदमाशों को तलाशा जा रहा है।
पुलिस को इस वारदात से पहले ही भनक लग गई थी कि जेल में बंद सुनील राठी लंबे समय से मोबाइल फोन पर इस मैसेंजर का इस्तेमाल कर रहा है।
इस संबंध में जेल प्रशासन को सतर्क भी किया गया था। कई बार इस बाबत पत्र भी भेजे गए थे।
इसके बावजूद जेल अधिकारियों ने न तो फोन जब्त करने की कोशिश की, न ही जेल में बदमाशों द्वारा इस्तेमाल की जा रही इंटरनेट सुविधा पर रोक लगाई।