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उत्तराखंडः तड़के कार के शो रूम के गैराज में लगी आग तो शाम को गद्दाें का गोदाम हुआ खाक

Mon, 09 Dec 2019 10:59 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 09 Dec 2019 10:59 AM IST
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Fire in car showroom garage in haldwani
गैराज में लगी आग - फोटो : अमर उजाला

आज तड़के हल्द्वानी स्थित एक कार के शो रूम के गैराज में आग लग गई। इससे लाखों का नुकसान होने की खबर है। आज सुबह करीब चार बजे रामपुर रोड स्थित हुंडई कार के शो रूम के पीछे स्थित खुशी मोटर गैराज में आग लग गई। आग में लाखों का नुकसान होने की खबर है। सूचना पर फायर ब्रिगेड की चार गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया। 

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रजाई गद्दे के स्टोर और किताबों की दुकान में लगी आग 


पुरोला (उत्तरकाशी) के मंदिर मार्ग क्षेत्र स्थित रजाई गद्दे के एक स्टोर और एक किताबों की दुकान में आग लग गई। आग लगने का कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। सोमवार देर शाम मोहम्मद आमीर के रजाई गद्दे के स्टोर में अचानक आग लग गई।

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आनन-फानन में लोगों ने स्टोर की ऊपरी मंजिल तथा आसपास मौजूद सभी दुकानों को खाली करा दिया। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पाने के प्रयास किया। खबर लिखे जाने तक फायर ब्रिगेड के जवान आग को पूरी तरह बुझाने के प्रयासों में जुटे हुए हैं।

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आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि दुकान मालिक मोहन कुमार के दो मंजिला व्यवसायिक परिसर में नीचे के कमरों में रजाई गद्दे का गोदाम और ऊपर की मंजिल में अन्य दुकानें हैं। रजाई की दुकान से लगी एक किताबों की दुकान में भी आग लग गई। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट होना बताया जा रहा है। 

बिना सुरक्षा आग में कूदने को मजबूर फायरमैन 

लापरवाह सिस्टम के चलते फायर मैन प्रतिदिन मौत से दो-दो हाथ करने को मजबूर हैं। ये हर रोज लोहा पिघला देने वाली आग में कूदकर लोगों की जान-माल की रक्षा करते हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा को लेकर कोई चिंतित नहीं है। फायर ब्रिगेड के पास जो इनकी सुरक्षा के उपकरण हैं उन्हें सिर्फ किसी रिहर्सल में स्टोर से बाहर निकाला जाता है। अग्निकांड में तो फायरमैन को मुंह पर गीले रुमाल और बदन पर सूती वर्दी से काम चलाना पड़ता है। जो उपकरण हैं भी उनमें से ज्यादातर उपयोग योग्य नहीं बचे हैं।  

दरअसल, फायरमैन के लिए जरूरी मानकों का प्रदेश में कहीं भी पालन नहीं होता। कमोबेश देहरादून में भी यही हाल है। बता दें कि मानकों के अनुसार फायरमैन को आग के बीच जाने के लिए प्रोक्सिमिटी सूट की जरूरत होती है। इसमें हेलमेट, दस्ताने, जूते और अग्निरोधक वर्दी होती है। वर्तमान में पूरे जिले में ऐसे कुल चार सूट मौजूद हैं। सूत्रों की मानें तो इन सूट को किसी रिहर्सल पर पहनने की सलाह दी जाती है।

जबकि, जिले में 50 फायरमैन तैनात हैं। इन सभी के लिए ये जरूरी होते हैं। इसके अलावा धुएं में सांस लेने के लिए भी उपकरणों (ब्रिदिंग एपरेटस) की जरूरत होती है। ऐसे 16 उपकरण देहरादून यूनिट के पास हैं। इनमें से 10 उपकरण उपयोग लायक ही नहीं हैं। जबकि वर्तमान में दून यूनिट को 70 उपकरणों की जरूरत है। इन उपकरणों की कमी पूरी करने के लिए फायर ब्रिगेड ने विभिन्न स्तरों पर डिमांड भेजी है। ज्यादातर उपकरणों के लिए वर्ल्ड बैंक के माध्यम से बजट मुहैया कराया जाता है।  
 

नहीं मिलता जोखिम भत्ता

फायर ब्रिगेड के कर्मचारी हर समय जोखिम में रहते हैं, लेकिन उनके वेतन में किसी प्रकार का जोखिम भत्ता शामिल नहीं किया है। जबकि, कुछ साल पहले बनी आपदा राहत फोर्स एसडीआरएफ को तो जोखिम भत्ता देने का प्रावधान किया है। 

मानव संसाधन की स्थिति 

पद - स्वीकृति - तैनाती - रिक्ती
कांस्टेबल - 56 - 42 - 14
हेड कांस्टेबल - 11 - 07 - 04
सब इंस्पेक्टर - 03 - 01 - 02
(सिटी सेंटर की स्थिति)

इस साल हुए अग्निकांड 

एक जनवरी से 30 नवंबर तक 
अग्निकांड-392
क्षति-9805000 रुपये 
बचाई गई संपति-6.78 करोड़ रुपये 

एक व्यक्ति की हुई मौत 

इस साल अग्निकांड में एक व्यक्ति की भी मौत हो चुकी है। सिटी क्षेत्र में कुल 19 सूचनाएं फायर ब्रिगेड को प्राप्त हुई थी, जिनमें जीवन संकट में था। इनमें इस साल अब तक 14 मनुष्यों को और 14 ही पशुओं को बचाया जा सका है। 
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