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देहरादून: निम के जंगलों में भड़की आग, उठा धुएं का गुबार, नहीं थम रहीं वनाग्नि की लपटें, फैली दहशत
Tue, 12 Apr 2022 07:06 PM IST
सुशील कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तरकाशी
Published by: सुशील कुमार
Updated Tue, 12 Apr 2022 07:06 PM IST
सार
वन क्षेत्राधिकारी मुखेम रेंज प्रदीप बिष्ट ने बताया कि सूचना पर आग को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आग की बड़ी लपटों को फैलने से रोकने के लिए फायर लाइन काटने के साथ सतह की आग को हरी झांड़ियों से बुझाने का प्रयास किया जा रहा है।
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उत्तराखंड के जंगलों में आग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिला मुख्यालय के आसपास जंगलों की आग थमती नहीं दिख रही है। वरुणावत पर्वत के बाद मंगलवार को निम और पोखरी गांव से लगे जंगलों में अचानक वनाग्नि भड़क उठी। जिसे काबू करने के लिए वन विभाग, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन टीम को मशक्कत करनी पड़ी। वहीं जंगलों में आग से शहर के आसमान में धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया।
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मंगलवार को देश के प्रतिष्ठित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से लगे वन क्षेत्र और पोखरी गांव के पास वनाग्नि धधक उठी। जिसने देखते-देखते वन क्षेत्र के बड़े हिस्से को अपनी जद में ले लिया। सूचना पर पहुंची वन विभाग, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन विभाग के त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) ने मौके पर पहुंचकर आग को काबू करने के लिए मशक्कत की।
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वन क्षेत्राधिकारी मुखेम रेंज प्रदीप बिष्ट ने बताया कि सूचना पर आग को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। आग की बड़ी लपटों को फैलने से रोकने के लिए फायर लाइन काटने के साथ सतह की आग को हरी झांड़ियों से बुझाने का प्रयास किया जा रहा है। बताया कि वन विभाग, एसडीआरएफ, क्यूआरटी के 25 लोग लगे हुए हैं। उन्होंने जल्द आग को बुझा लेने की बात कही। इस दौरान आग बुझाने के लिए ग्रामीणों ने भी वन विभाग के साथ मिलकर सहयोग दिया। वहीं डीएफओ पुनीत तोमर भी मौके पर मौजूद रहे।
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आग से चारों ओर फैली धुंध, उमस भी बढ़ी
जंगलों की आग का दुष्प्रभाव वायु सेना के अभ्यास पर भी भारी पड़ा है। वनाग्नि से वातावरण में चारों ओर फैली धुंध के चलते वायु सेना को अपना रात्रि अभ्यास रद्द करना पड़ा। धुंध साफ होने पर वायु सेना के अभ्यास को पुन: शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर वायु सेना ने रविवार से दो दिवसीय रात्रि अभ्यास शुरू किया था। जिसके तहत यहां आपातकाल,आपदा व युद्घ जैसी स्थिति में एडवांस लैंडिंग व टेक ऑफ के लिए रात्रि अभ्यास शुरू किया गया था।
इसके लिए सेना ने यहां रविवार को हवाई अड्डे पर नाइट सिग्नल लाइटें लगाई थीं। रात्रि अभ्यास के पहले दिन रविवार को यहां सेना के हैलीकॉप्टरों ने अभ्यास भी किया था। लेकिन क्षेत्र में लगी जंगलों की भीषण आग से मंगलवार को वातावरण में चारों ओर धुंध फैली रही। जिससे वायु सेना को दो दिवसीय अभ्यास एक ही दिन में समाप्त करना पड़ा। हवाई पट्टी के प्रोजेक्ट मैनेजर घनश्याम सिंह ने बताया कि धुंध के कारण सेना को अभ्यास टालना पड़ा। धुंध साफ होने पर अभ्यास पुन: शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
चारों ओर धुंध से लोग भी परेशान
वातावरण में चारों ओर फैली धुंध से स्थानीय लोग भी खासे परेशान हैं। खासतौर पर बुजुर्गों व बच्चों को आखों में जलन व आंसू आने की समस्या से जूझना पड़ रहा है। वहीं, जंगलों की आग ने क्षेत्र में उमस भी बढ़ा दी है। चिकित्सकों का कहना है कि आंखों में जलन होने पर आंखों को मले नहीं। जितना हो सके आखों को पानी से धोते रहें। चश्मों का प्रयोग करें।
आग से एक हेक्टेयर वन संपदा को नुकसान
श्रीनगर के समीप खोला और ऐठाणा के जंगलों में लगी आग पर वन विभाग ने काबू पा लिया है। वनाग्नि से लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्र में वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। सोमवार दिन में खोला के जंगलों में आग लग गई। धीरे-धीरे आग ऐठाणा के जंगलों तक पहुंच गई। शाम तक खोला के जंगलों में लगी आग पर वन विभाग ने काबू पा लिया था, लेकिन ऐठाणा में आग पर नियंत्रण पाने में समय लग गया। वहीं जंगलों की आग से निकला धुआं घाटी में फैला हुआ है। वन क्षेत्राधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि खोला और ऐठाणा के वन पंचायत के जंगलों में आग फैल गई थी। खोला में शाम 6 बजे तक आग पर नियंत्रण पा लिया था, जबकि ऐठाणा में रात 11 बजे टीम ने आग बुझा दी।
कस्बे में पहुंची आग
जंगलों की आग बस्ती तक पहुंचने पर अफरा-तफरी का माहौल हो गया है। जिससे हाईवे पर आवाजाही में दिक्कत होने लगी है। सरुखेत बस्ती में दहशत फैल गई। सूचना मिलने पर अग्निशमन दल ने मौके पर जाकर छुलकों की ढेर लगी आग पर नियत्रंण पा लिया, जबकि कंसेरु, चक्रगांव, उपराडी, साडा, डीएफओ कार्यालय के आसपास, दुबाटा आदि क्षेत्र मे पिछले कई दिनों से जंगल आग की चपेट में आ गया है। इससे लाखों की वन सम्पदा के नुकसान के साथ पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।