सीटों पर मची खलबली से बिगड़ा कांग्रेस का खेल?
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कांग्रेस में सीटों को लेकर मची खलबली से कांग्रेस का खेल बिगड़ गया। रायपुर से कांग्रेस के बागी विधायक उमेश शर्मा काऊ के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत डोईवाला विधानसभा सीट खाली कराना चाहते हैं। यही वजह है कि उन्हें रायपुर के बजाय कैंट से तैयारी के लिए कहा जा रहा था।
कांग्रेस के चुनावी शंखनाद से सीटों को लेकर तमाम विस क्षेत्रों में खलबली शुरू हो गई। रायपुर से कांग्रेस के बागी विधायक उमेश शर्मा काऊ ने कहा कि उन्हें बार-बार कैंट से तैयारी के लिए कहा जाने लगा। राजपुर के विधायक राजकुमार की मौजूदगी में इस मसले को लेकर जब वे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिले तो उन्होंने भी कैंट पर ध्यान देने के लिए कहा।
विधायक ने कहा कि उनका रायपुर से टिकट काटने की तैयारी होने लगी। रायपुर से वर्ष 2012 में वह विधायक चुने गए। इससे पहले यहां कांग्रेस के मात्र दो पार्षद थे। उनके विधायक बनने के बाद उन्होंने कांग्रेस को छह पार्षद, 24 ग्राम प्रधान, 22 क्षेत्र पंचायत, तीन जिला पंचायत सदस्य एवं एक ब्लॉक प्रमुख कांग्रेस को दिया। विधायक ने कहा रायपुर उनकी कर्मभूमि है वे यहीं से अगला चुनाव लड़ेंगे। भाजपा या फिर कांग्रेस से चुनाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता जिससे कहेगी उसी पार्टी से लड़ेंगे।
खुद या बेटी को चुनाव लड़ाना चाहते हैं हरीश
कांग्रेस के बागी विधायक उमेश शर्मा काऊ ने कहा कि पूर्व सीएम हरीश रावत उन्हें कैंट से और डोईवाला विधायक हीरा सिंह बिष्ट को रायपुर से चुनाव लड़ाकर डोईवाला सीट खाली कराना चाहते हैं। ताकि वे खुद या फिर अपनी बेटी को यहां से चुनाव लड़ा सकें।
इस तरह से मची खलबली
कांग्रेस में टिकट को लेकर खलबली मची है। कैंट में जहां क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने पूर्व में बैठक कर विधानसभा क्षेत्र से बाहर के व्यक्ति को चुनाव न लड़ाने का एलान किया। वहीं कांग्रेस के बागी विधायक की बयानबाजी से अन्य सीटों को लेकर मचा घमासान सामने आ गया।
अधिकतर सीटों पर कांग्रेस है काबिज
दून में विधानसभा की दस सीटों में से अधिकतर सीटों पर कांग्रेस कब्जा जमाए हुए हैं। चकराता, विकासनगर, धर्मपुर, रायपुर, राजपुर रोड और डोईवाला कांग्रेस के कब्जे में है। जबकि सहसपुर, देहरादून कैंट, मसूरी और ऋषिकेश में भाजपा काबिज है।
कहीं कुछ और मायने तो नहीं
कांग्रेस में विधानसभा सीटों को लेकर एक कंपनी से सर्वे कराया गया। सूत्रों की मानें तो इसमें कांग्रेस के लिए कैंट और मसूरी सबसे कमजोर सीट है। ऐसे में यह भी हो सकता है कि पूर्व सीएम ने इस सीट पर काम करने के लिए कहा हो, लेकिन विधायक यह मानने को तैयार नहीं है। विधायक उमेश शर्मा ने कहा कि वह इसके कोई और मायने नहीं निकाल सकते।
1989 से भाजपा के हरबंस हैं काबिज
कैंट जो इससे पहले देहराखास सीट का हिस्सा थी। भाजपा विधायक हरबंस कपूर वर्ष 1989 से लगातार इस सीट पर काबिज हैं। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि काऊ भ्रामक प्रचार कर रहे हैं। कैंट शहरी सीट है। पूर्व सीएम और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने किसी को किसी भी सीट पर तैयारी के लिए नहीं कहा।
विधायक उमेश शर्मा के तमाम आरोप बेबुनियाद हैं, किस सीट से किसे टिकट मिलेगा इसे पार्टी हाईकमान तय करता है। सीएम और प्रदेश अध्यक्ष केवल पैनल बनाकर भेजते हैं।
-मथुरादत्त जोशी, कांग्रेस मुख्य प्रवक्ता