10वीं से लेकर एमएससी तक प्रथम श्रेणी से पास हुए सुधांशु ने इसलिए चुना ठगी का रास्ता
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हाईस्कूल में 71 प्रतिशत और 12वीं में 67 प्रतिशत अंक। इसके बाद प्रथम श्रेणी से स्नातक और एमएससी में 87 फीसदी अंक लेकर पास हुआ।
काम धंधे की तलाश में कानपुर से देहरादून आया तो यहां एक बड़े स्कूल में गणित का अध्यापक बन गया। एक साल अध्यापन करने के बाद प्रशासनिक सेवाओं में भाग्य आजमाना चाहा। साल 2014 उत्तर प्रदेश पीसीएस परीक्षा में बैठा। मुख्य परीक्षा भी पास कर ली, लेकिन साक्षात्कार में भाग्य ने धोखा दे दिया।
यह ब्योरा किसी संघर्षशील छात्र का नहीं बल्कि फर्जी पीसीएस अधिकारी सुधांशु पांडेय का है, जो अपनी एक असफलता को दुर्भाग्य समझ बैठा और पैसा कमाने को शार्टकट अपना लिया। अब यही शार्टकट उसे जेल तक ले गया।
सुधांशु ने 2014 के बाद 2016 में यूपीपीसीएस परीक्षा के लिए आवेदन किया था, मगर यह परीक्षा किन्हीं कारणों से रद्द हो गई थी। इसके बाद छोटे मोटे काम कर अपना खर्च चलाने लगा, लेकिन अधिकारियों बनने की ललक उसे सता रही थी। यही कारण था कि वह सब कुछ छोड़कर झूठ की जिंदगी जीने लगा।
उसने अपना रहन सहन अधिकारियों के जैसा ही बना लिया। कार भी ले ली और शादी के बाद एक बड़ा मकान किराए पर ले लिया। हर रोज पार्टी करना और बड़े बड़े लोगों के साथ उठना बैठना अब उसकी आदत में शुमार हो गया। इसके बाद जब खर्च पूरे नहीं हुए तो उसने जनवरी 2018 से खुद को पीसीएस अधिकारी बताना शुरू कर दिया। कार पर उत्तराखंड सरकार का बोर्ड लगाकर घूमने लगा।
गलती बनेगी सुबूत
सुधांशु हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखता है। उसने किसी अन्य को अपना राजदार नहीं बनाया था। यह सोचकर कि कोई उसकी पोल खोल देगा। उसने कभी सरकारी कागजों को नहीं देखा था। लिहाजा उसने जो भी कागजात बनाए खुद की समझ से बनाए। चूंकि उसके पास विभागों के लेटर हेड या अन्य प्रपत्रों का प्रारूप नहीं था तो उसने कई गलतियां भी कीं। यही गलती अब उसके खिलाफ जालसाजी के आरोप को तय करने के लिए काफी होंगी।