एक्सक्लूसिव: मसूरी की पहाड़ियों में मिली दुर्लभ प्रजाति की शाकाहारी छिपकली, खाती है सिर्फ पत्ते
- भारतीय वन्यजीव संस्थान के सरीसृप विज्ञानियों का दावा, उत्तराखंड में पहली बार खोजी गई पत्ते खाने वाली छिपकली
- लद्दाख और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में भी पाई जाती हैं पत्तियां खाने वाली अन्य प्रजाति की छिपकलियां
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भारतीय वन्यजीव संस्थान के सरीसृप विज्ञानियों ने मसूरी क्षेत्र की पहाड़ियों में छिपकली की एक ऐसी प्रजाति की खोज की है, जो सिर्फ पत्ते खाती है। सरीसृप विज्ञानियों के मुताबिक हिमालयन रॉक अगामा प्रजाति की यह दुर्लभ शाकाहारी छिपकली देखने में तो सामान्य छिपकली की तरह ही होती है, लेकिन इनका खानपान थोड़ा हटकर है। विज्ञानियों का दावा है कि उत्तराखंड में छिपकली की इस प्रजाति की खोज पहली बार की गई है।
सरीसृप विज्ञानी डॉ. अभिजीत दास की अगुवाई में भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों, शोधार्थियों की टीम ने मसूरी क्षेत्र में पहाड़ों की दरारों में हिमालयन रॉक अदामा प्रजाति की छिपकलियों की खोज की है, जो अपने आप में दुर्लभ है।
बताया कि इस प्रजाति की छिपकली की लंबाई औसतन 18 सेंटीमीटर होती है। जबकि, मादा की तुलना में नर की लंबाई डेढ़ गुना अधिक होती है। इस प्रजाति की नर छिपकली गिरगिट की भांति अपना रंग बदलने में माहिर होती है। खासकर प्रजनन के समय नर का पूरा शरीर गहरे नीले रंग का हो जाता है।
छिपकली में रंग को लेकर कोई बदलाव नहीं
वहीं, मादा छिपकली में रंग को लेकर कोई बदलाव नहीं पाया गया है। यह छिपकली पूरी तरह शाकाहारी होती है और पहाड़ों की चट्टानों पर उगे पेड़ पौधों की पत्तियों पर ही पूरी तरह आश्रित होती है।
डॉ. अभिजीत के मुताबिक इस तरह की छिपकली की कुछ प्रजातियां लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाई जाती हैं, लेकिन छिपकली की जो प्रजाति मसूरी क्षेत्र में मिली है वह लद्दाख और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में पाई जाने वाली शाकाहारी छिपकलियों से थोड़ा हटकर है।
देश में 300 तो पूरी दुनिया में हैं छिपकली की 8000 प्रजातियां
भारतीय वन्यजीव संस्थान के विज्ञानियों के मुताबिक देश में छिपकलियों की 300 के करीब प्रजातियां पाई जाती हैं। गंगा के मैदानी क्षेत्रों से लेकर उच्च हिमालयी क्षेत्रों तक में छिपकलियां पाई जाती हैं। वहीं, पूरी दुनिया में छिपकलियों की औसतन 8000 प्रजातियां चिह्नित की गईं हैं।