फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Excessive human interference disturbed the ecological balance

अत्यधिक मानव हस्तक्षेप ने बिगाड़ा पारिस्थितिकी संतुलन

Fri, 10 Sep 2021 02:05 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 10 Sep 2021 02:05 AM IST
विज्ञापन
Excessive human interference disturbed the ecological balance
हर साल 9 सितंबर को हिमालय दिवस मनाया जाता है, ताकि लोगों को पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व के बारे में जागरूक किया जा सके। वन अनुसंधान संस्थान ने बृहस्पतिवार को हिमालय दिवस मनाया। जिसका विषय ‘हिमालय में ब्लैक कार्बन प्रदूषण और इसके शमन’ पर ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक डॉ. कालाचॉद साईं ने यह व्याख्यान दिया।
विज्ञापन

कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद के महानिदेशक अरुण सिंह रावत ने की। उन्होंने कहा कि हिमालय कई नदियों का उद्गम स्थल है, जो हमारी जीवन रेखा है। हम सभी अपने अस्तित्व और आजीविका के लिए हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर हैं। मानव हस्तक्षेप के कारण और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन ने भूकंप, बाढ़ और सूखे के रूप में हमारे लिए एक खतरनाक स्थिति पैदा कर दी है। प्रकृति के अस्तित्व के लिए और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण में योगदान देना सभी का कर्तव्य है।
विज्ञापन

डॉ. साईं ने अपने व्याख्यान में उल्लेख किया कि ब्लैक कार्बन ज्यादातर बायोमास के जलने और धुएं के उत्सर्जन से उत्पन्न होता है, जो सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करके ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनता है। ब्लैक कार्बन से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक और सौर ऊर्जा के उपयोग को घरेलू और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए अधिक से अधिक किया जाना चाहिए। ब्लैक कार्बन जनित प्रदूषण की निगरानी, प्रबंधन और शमन के लिए लोगों की भागीदारी में प्रभावी रणनीति तैयार की जानी चाहिए। कार्यक्रम में एफआरआई के विभिन्न अधिकारियों, वैज्ञानिकों, संगठनों, छात्रों, प्रशिक्षु अधिकारियों सहित 70 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। जिनमें डॉ. गणनाथ ठाकरे, डॉ. चरण सिंह, ऋचा मिश्रा आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

हिमालयी क्षेत्र में जल अभयारण्य बनाने पर जोर दिया
सीएसआईआर, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान में बृहस्पतिवार को हिमालयन दिवस का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम का विषय ‘हिमालय : ज्ञान तथा विज्ञान’ रहा। सीएसआइआर-आईआईपी निदेशक डॉ. अंजन रे कार्यक्रम की शुरुआत की। पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी संस्थापक हिमालयन एन्वायरमेंटल कंजर्वेशन ऑर्गेनाइजेशन (हेस्को) ने वीडियो संदेश के जरिये हिमालयन दिवस के महत्व और इसके आयोजन की सार्थकता को परिभाषित किया। डॉ. रितेश विजय ने देहरादून अंचल के भू-पर्यावरण पर पर्यटन के दुष्प्रभाव संबंधी जानकारी दी। उन्होंने हिमालय क्षेत्र में भूस्खलन एवं मानवीय अतिक्रमण आदि से संबद्ध विषयों और चुनौतियों पर भी चर्चा की। किरीट कुमार ने हिमालयी क्षेत्र के गांवों में जल संकट के निदान तथा जल सुरक्षा के लिए जल अभयारण्य निर्माण पर जोर दिया। कार्यक्रम में पूनम गुप्ता, डॉ. जीडी ठाकरे, सूर्यदेव, अंजली भटनागर, पंकज भास्कर आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed