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अब चीन को पछाड़ेंगे भारत के पूर्व सैनिक और अर्द्धसैनिक, बनाया ये प्लान

Thu, 24 Aug 2017 05:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 24 Aug 2017 05:35 PM IST
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Ex-servicemen and paramilitary make plan against china 

चीन के नापाक इरादों से न‌िपटने के ल‌िए भारत के पूर्व सैनिक-अर्द्धसैनिकों ने ठान ली है। उन्होंने इसके ख‌िलाफ एक प्लान भी तैयार क‌‌िया है। ज‌िससे वे चीन को पछाड़ भारत को जीत द‌िला सकेंगे। 

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उत्तराखंड पूर्व सैनिक-अर्द्धसैनिक संयुक्त संगठन की 24वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड के विकास का संकल्प लिया गया। चीन की आक्रामक नीति समेत तमाम खतरों पर सक्रिय होने और देवभूमि के लोगों को जगाने का संकल्प लिया गया। तय किया गया कि 14 सितंबर को पूर्व सैनिक-अर्द्धसैनिक हरिद्वार से लेकर बद्रीनाथ धाम तक जनजागरण यात्रा निकालेंगे। 
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बालावाला में आयोजित सम्मेलन के मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल राम सिंह प्रधान ने कहा कि चीन की आक्रामक मानसिकता को देखते हुए उत्तराखंड के पूर्व सैनिक-अद्धसैनिकों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उत्तराखंड और चीन की सीमा सटी हुई है। इसलिए हमारे सामने बहुआयामी चुनौतियां हैं।
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उन्होंने कहा कि हमारे अनुभवों का लाभ मातृभूमि को मिलना चाहिए। सीमांत और सुदूरवर्ती पर्वतीय इलाकों में हमें अधिक सक्रिय होना होगा। उन्होंने कहा कि सेवा में रहते हुए हमने देश की सेवा की, अब प्रदेश के विकास में भी योगदान देना होगा। यहां की दिव्य आध्यात्मिक और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं को बलशाली बनाना हमारा दायित्व है।  

Ex-servicemen and paramilitary make plan against china 

उत्तराखंड पूर्व सैनिक अर्द्धसैनिक संयुक्त संगठन के अध्यक्ष रिटायर्ड आईएएस सुरेंद्र सिंह पांगती ने कहा कि उत्तराखंड भारत का मस्तक है। भारतीय राष्ट्रवाद, संस्कृति, सभ्यता और अध्यात्म का सबसे बड़ा केंद्र है। कुछ विनाशकारी ताकतें हमारी इस महान अमूल्य संपदा को नष्ट करने पर तुली हैं।

इसलिए पूर्व सैनिक-अर्द्ध सैनिकों को इस दिशा में सक्रियता दिखानी होगी। उन्होंने कहा कि गंगा, यमुना, शारदा (सरस्वती) को बचाने के साथ ही यहां के भूगोल, पर्यावरण और मानव संपदा का विकास हमारी जिम्मेदारी है।

संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एमएन बंदूनी और महासचिव पीसी थपलियाल ने कहा कि आज उत्तराखंड पर चौतरफा खतरे हैं। राजनीतिज्ञों को यहां की आध्यात्मिक विरासत की परवाह नहीं है। पुरातत्व के अवशेषों की उपेक्षा की जा रही है।

राजनीतिक दलोें ने सामाजिक जीवन को दूषित करने का काम किया है। अब संगठन दूरगामी कार्ययोजना तैयार कर रहा है। इसमें पूर्व सैनिकों की बड़ी भूमिका होने वाली है। संचालन महासचिव पीसी थपलियाल ने किया। सम्मेलन में कैप्टन डीपी बलूनी, सुरेंद्र नौटियाल, सूबेदार मेजर उमराव सिंह रावत, लक्ष्मण सिंह कठैत, बलबीर सिंह बिष्ट, पीएस पटवाल, आरपी कोटनाला, कैप्टन अजीत रावत, जेएस वसेरा, डीएस पंवार, पुष्पा बड़थ्वाल ने भी विचार व्यक्त किए। इसके साथ ही पूर्व सैनिकों के परिजनों ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।

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