पूर्व राज्यपाल कुरैशी को थी अवैध 'कक्षाओं' की जानकारी
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उत्तराखंड में उच्च शिक्षा निदेशक की जांच रिपोर्ट में सांध्यकालीन कक्षाओं को अवैध ठहराए जाने से करीब एक माह पहले राजभवन ने भी पूरी प्रक्रिया को गलत बताया था।
उत्तराखंड से जाने से एक दिन पूर्व तत्कालीन राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी की ओर से जारी पत्र में साफ कहा गया था कि एक संस्थान में दो अलग अलग विश्वविद्यालयों के समान पाठ्यक्रम चलें तो सांध्यकालीन कक्षाएं अवैध होंगी।
यही नहीं, पत्र में ऐसा होने की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद सरकार सजग नहीं हुई और छह हजार छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया और दस हजार युवाओं की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
डीएवी महाविद्यालय में सांध्यकालीन कक्षाओं के संचालन के लिए सरकार ने राजभवन से श्रीदेव सुमन विवि की सीटें देने की मांग की थी। छह जनवरी को तत्कालीन राज्यपाल डा. कुरैशी की अनुमति के बाद छह जनवरी को विशेष कार्याधिकारी अरुण कुमार ढौंढियाल ने 13 बिंदुओं वाला पत्र जारी किया था।
इसमें डीएवी के लिए कुल 1680 सीटों (बीए में 160, बीएससी में आठ विषयों में प्रत्येक में 160 और बीकॉम में 240 सीटें) की व्यवस्था करने के लिए कहा गया था। लेकिन पत्र के बिंदु संख्या छह में यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया था कि महाविद्यालय में चलने वाले सभी पाठ्यक्रम एक ही विश्वविद्यालय के हों। ऐसा नहीं होने पर संबंधित संस्थान पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
यह लिखा था बिंदु छह में
‘संस्थान के कैंपस में बीए, बीएससी और बीकॉम पहले से संचालित हैं। अब अन्य किसी विश्वविद्यालय से संबंधित इसी प्रकार का कोर्स संचालित होने की दशा में संबंधित संस्थान के विरुद्ध नियमानुसार यथोचित कार्रर्वाई की जाएगी।’
सोए रहे अधिकारी और विवि
राजभवन से श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय को जारी पत्र की प्रति उच्च शिक्षा सचिव और उच्च शिक्षा निदेशक को भी भेजी गई थी। लेकिन अधिकारियों ने इस पत्र का संज्ञान नहीं लिया। सीटें बढ़ाए जाने की संस्तुति को ही पत्र का सार मान दाखिले प्रारंभ करा दिए गए। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय ने भी सीटें बढ़ाई, लेकिन पत्र की चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया। प्रदेश सरकार ने भी संज्ञान लेने का प्रयास नहीं किया।
मैंने सिर्फ राय दी है...
एक कालेज में दो-दो विश्वविद्यालय से कोर्स चलाने के मसले पर शासन ने हमसे राय मांगी है, मैंने राय ही दी है। पत्र में बताया गया है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नियमावली के अनुसार एक कालेज में, एक ही समय पर, एक जैसे पाठ्यक्रम अलग-अलग विश्वविद्यालयों द्वारा संचालित करने का प्रावधान नहीं है। सांध्य कक्षाएं वैध हैं या अवैध, यह तय करना मेरा काम नहीं है।
-डा. जगदीश प्रसाद, उच्च शिक्षा निदेशक।