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 #KabTakNirbhaya: उत्तराखंड में हर तीन घंटे में एक महिला होती है अत्याचार का शिकार

Mon, 02 Dec 2019 11:35 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 02 Dec 2019 11:35 AM IST
सार

  • आंकड़ों के मुताबिक हर 15वें घंटे एक महिला से होता है दुष्कर्म 
  • इस वर्ष सितंबर तक 2136 महिलाएं हुई हैं किसी न किसी प्रकार के अत्याचार की शिकार 
  • नौ माह में राज्य में 46 महिलाओं की हो चुकी है हत्या, 428 से हुआ दुष्कर्म 
  • राजधानी देहरादून में नवंबर तक 119 महिलाएं हुई हैं दरिंदिगी का शिकार 

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Every three hours in Uttarakhand A woman is a victim of atrocities
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शांत आबोहवा और तीर्थाटन के लिए प्रख्यात देवभूमि में महिलाओं से अपराध की स्थिति काफी भयावह है। यहां हर तीसरे घंटे एक महिला किसी न किसी तरह के अत्याचार का शिकार होती है। जबकि, हर 15वें घंटे पहाड़ की एक बेटी से दुष्कर्म होता है।

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सितंबर माह के अंत तक राज्य में 2136 महिला अपराध से जुड़े मामले दर्ज हुए, जिनमें 428 मुकदमे दुष्कर्म के शामिल हैं। राजधानी देहरादून में भी औसतन दो महिलाएं अपने प्रति हुए अत्याचार की कहानी पुलिस में दर्ज कराती हैं। 
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सितंबर के अंत तक तीन वर्षों के तुलनात्मक आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2017 में महिला के खिलाफ कुल 1771 अपराध दर्ज किए गए थे। इसके अगले साल 2018 में इनमें लगभग 23 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह आंकड़ा 2219 तक पहुंच गया। जबकि, इस साल लगभग पांच फीसदी की कमी इस अवधि में दर्ज की गई। 30 सितंबर 2019 तक प्रदेश में कुल 2136 अपराध सामने आए हैं।
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इधर, दुष्कर्म की बात करें तो पिछले साल समान अवधि में 394 केस दर्ज किए गए थे जो कि इस साल बढ़कर 428 हो गए हैं। पुलिस के आला अधिकारियों की मानें तो मामलों में बढ़ोतरी का कारण सिर्फ अपराध बढ़ना नहीं बल्कि पीड़िताओं के सामने आकर अपराध को बताना भी है। यानी महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े आंकड़े बिना कोताही के दर्ज किए जा रहे हैं। 

राजधानी में पिछले साल की तुलना में गिरावट 

महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में राजधानी देहरादून में गिरावट दर्ज की गई है। 30 नवंबर तक के तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार इनमें 12 फीसदी कम मामले दर्ज हुए हैं। हालांकि, राजधानी की सड़कों पर महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ी हैं। पिछले साल समान अवधि में 63 मामले दर्ज हुए थे, लेकिन इस बार यह बढ़कर 71 हो गए हैं। 

राजधानी देहरादून में 30 नवंबर तक की स्थिति 

अपराध   -     2019   -     2018
हत्या     -   06      -         13
दुष्कर्म   -     119  - 123
छेड़छाड़  -  71 -   63
अपहरण  -  45    -    76
अश्लील हरकत  -  09    -    30
चैन लूट     -   17     -       21
दहेज उत्पीड़न     -   192   - 188
दहेज हत्या  -  07   -     12
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न  -  01  -  00
अन्य अपराध  -  40   -     40

1090 पर 4 हजार शिकायतें

इस साल 30 नवंबर तक महिला हेल्पलाइन पर कुल चार हजार शिकायतें आई हैं। जबकि, पिछले साल यह संख्या 5500 के आसपास थी। हालांकि, इस साल 1090 नंबर को 112 के साथ भी जोड़ा गया है। यानी 1090 वाली बहुत सी शिकायतें 112 पर भी आ रही हैं। 

महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है। इसके लिए जगह जगह पुलिस निगरानी के साथ साथ जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। जहां तक अपराध बढ़ने की बात है तो पहले की अपेक्षा अब जागरूकता के चलते भी लोग सामने आकर अपने साथ हुई घटनाओं को दर्ज कराते हैं। सभी मामलों में पुलिस गंभीरता से विवेचना कर आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने पर जोर देती है। 
अशोक कुमार, महानिदेशक (कानून व्यवस्था)

साल में 70 से 90 दुष्कर्मियों को होती है सजा 

पॉक्सो कानून आने के बाद से दुष्कर्मियों को सजा मिलने में भी तेजी आई है। बच्चियों से दुष्कर्म के मामलों में दो साल के भीतर चार दोषियों को विशेष पॉक्सो कोर्ट से मृत्युदंड भी दिया जा चुका है। जबकि, हर साल लगभग 70 से 90 दुष्कर्मियों विभिन्न अवधि के कारावास की सजा सुनाई जाती है।


बता दें कि पॉक्सो कानून के अंतर्गत दर्ज होने वाले मामले फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलते हैं। शासकीय अधिवक्ता भरत सिंह नेगी ने बताया कि इस इस कानून के तहत दो माह के भीतर ही पुलिस को चार्जशीट दाखिल करनी होती है। जबकि, दो साल के भीतर इस केस को समाप्त करना होता है।

 

लिहाजा, अभियोजन बीते दो सालों से बच्चियों के प्रति होने वाले अपराधों के निस्तारण को दिन रात काम कर रहा है। हर महीने सात से 10 मुकदमों का निस्तारण होता है। जहां तक जल्द से जल्द निस्तारण की बात है तो एक साल से भी कम समय में पोक्सो कोर्ट से फैसले सुनाए गए हैं। 

बोर्डिंग स्कूल सामूहिक दुष्कर्म में आने वाला है फैसला 

सहसपुर क्षेत्र में बोर्डिंग स्कूल के हॉस्टल के भीतर बच्ची से दुष्कर्म के मामले में भी जल्द फैसला आने वाला है। इस मामले में तीन नाबालिग और एक बालिग छात्र के साथ साथ प्रबंधन के चार लोग भी आरोपी थे।
 

 

हालांकि, किशोर न्याय बोर्ड ने तीन नाबालिगों को बरी कर दिया था। लेकिन, अभियोजन की ओर से इसकी ऊपरी अदालत में चुनौती दी गई है। पॉक्सो अदालत में चल रहा मामले में गवाहों की गवाही अंतिम दौर में चल रही है। बता दें कि पिछले साल सितंबर में यह मामला सामने आया था और घटना 14 अगस्त 2018 की बताई गई है।

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