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Dehradun News: विकासनगर में हर रोज तीन लोगों को हो रही सीओपीडी और एक को टीबी
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उप जिला अस्पताल में रोजाना सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) के तीन और टीबी के एक नए केस मिल रहे हैं। सीओपीडी के अधिकांश मामले शहरी क्षेत्र के हैं तो टीबी के अधिकांश मामले ग्रामीण क्षेत्रों के हैं। दवा के सेवन में लापरवाही से संक्रमित मरीज एमडीआर टीबी से भी ग्रस्त हो रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि जागरूकता और एहतियात से ही दोनों बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
उप जिला अस्पताल में रोजाना सीओपीडी से ग्रस्त छह मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से तीन नए केस होते हैं। बीते साल सीओपीडी के दैनिक नए केस की संख्या दो थी। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केएस चौहान ने बताया कि अधिकांश मामलों में लंबे समय से धूम्रपान करने वाले लोगों को सीओपीडी की समस्या होती है। वहीं, कुछ मामलों में छोटे उद्योगों में धुएं के बीच काम करने और खाना बनाने के लिए चूल्हे का प्रयोग करे वाली महिलाओं को भी सीओपीडी की समस्या होती है। बरसात और सर्दी के मौसम में ऐसे मरीजों की समस्या बढ़ जाती है।
जनवरी से लेकर 25 सितंबर तक उप जिला अस्पताल स्थित टीबी केंद्र में संक्रमण के 317 मामले आए है। वहीं, 50 अतिरिक्त मामले एक संस्था के अस्पताल में भी रिपोर्ट हुए हैं। इनमें से 20 मामले एमडीआर टीबी के हैं। करीब 150 मरीज टीबी मुक्त हो चुके हैं। जबकि, चार की मौत हो गई थी। वर्ष 2023 में टीबी केंद्र में संक्रमण के 457 मामले दर्ज हुए थे। इसमें से 18 मरीजों की मौत हो गई थी। चार से केंद्र की टीम का संपर्क नहीं हो पाया। 435 मरीज स्वस्थ्य हो गए। 87 अतिरिक्त मामले एक संस्था के अस्पताल से रिपोर्ट हुए थे।
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डॉ. केएस चौहान बताते हैं कि घर और आसपास, साफ-सफाई का अभाव, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने पर मास्क न पहनना, खान पान में कमी और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के चलते लोग टीबी की चपेट में आते हैं। इससे अधिक लापरवाही यह है कि कई मरीज कुछ आराम मिलने के बाद उपचार की अवधि पूरी हुए बिना ही दवा छोड़ देते है। इससे वह एमडीआर टीबी से ग्रस्त हो जाते हैं। इस तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
सीओपीडी के लक्षण
- लगातार खांसी
- सांस लेने में तकलीफ, खासकर शारीरिक गतिविधियों के दौरान
- सांस लेते समय घरघराहट या सीटी जैसी आवाज आना
- काफी मात्रा में बलगम आना
- सीने में जकड़न या भारीपन
- ऊर्जा की कमी या बहुत थकान महसूस होना
- बार-बार फेफड़ों में संक्रमण होना
- वजन का घटना
- सुबह के समय सिरदर्द होना
टीबी के लक्षण
- दो सप्ताह से अधिक खांसी
- खांसी में खून आना
- सीने में दर्द
- शाम को बुखार आना
- वजन कम होना
- भूख में कमी
- रात में पसीना आना
- कमजोरी और थकान
- सांस लेने में तकलीफ
सीओपीडी और टीबी से बचाव
- धूम्रपान बंद कर दें
- भोजन बनाने के लिए चूल्हे का प्रयोग न करें
- घर के आसपास सफाई रखें
- हाथों का बार बार धोएं
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाते समय मास्क पहनें
- खांसते छींकते समय मुंह पर कपड़ा रखें
- दूसरे के प्रयोग किए गए तौलिए, रुमाल और तकिए का प्रयोग न करें
- बर्तनों, गिलास और पानी की बोतल को साझा न करें।
- घर और आसपास सफाई रखें
- टीबी की दवा का पूरा काेर्स करें
- अगर दो सप्ताह से अधिक खांसी है तो चिकित्सक को दिखाएं
- प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के घर के बने भोजन, हरी सब्जियों, मौसमी फलों का सेवन करें।
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उप जिला अस्पताल में रोजाना सीओपीडी से ग्रस्त छह मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से तीन नए केस होते हैं। बीते साल सीओपीडी के दैनिक नए केस की संख्या दो थी। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केएस चौहान ने बताया कि अधिकांश मामलों में लंबे समय से धूम्रपान करने वाले लोगों को सीओपीडी की समस्या होती है। वहीं, कुछ मामलों में छोटे उद्योगों में धुएं के बीच काम करने और खाना बनाने के लिए चूल्हे का प्रयोग करे वाली महिलाओं को भी सीओपीडी की समस्या होती है। बरसात और सर्दी के मौसम में ऐसे मरीजों की समस्या बढ़ जाती है।
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जनवरी से लेकर 25 सितंबर तक उप जिला अस्पताल स्थित टीबी केंद्र में संक्रमण के 317 मामले आए है। वहीं, 50 अतिरिक्त मामले एक संस्था के अस्पताल में भी रिपोर्ट हुए हैं। इनमें से 20 मामले एमडीआर टीबी के हैं। करीब 150 मरीज टीबी मुक्त हो चुके हैं। जबकि, चार की मौत हो गई थी। वर्ष 2023 में टीबी केंद्र में संक्रमण के 457 मामले दर्ज हुए थे। इसमें से 18 मरीजों की मौत हो गई थी। चार से केंद्र की टीम का संपर्क नहीं हो पाया। 435 मरीज स्वस्थ्य हो गए। 87 अतिरिक्त मामले एक संस्था के अस्पताल से रिपोर्ट हुए थे।
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डॉ. केएस चौहान बताते हैं कि घर और आसपास, साफ-सफाई का अभाव, भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने पर मास्क न पहनना, खान पान में कमी और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के चलते लोग टीबी की चपेट में आते हैं। इससे अधिक लापरवाही यह है कि कई मरीज कुछ आराम मिलने के बाद उपचार की अवधि पूरी हुए बिना ही दवा छोड़ देते है। इससे वह एमडीआर टीबी से ग्रस्त हो जाते हैं। इस तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
सीओपीडी के लक्षण
- लगातार खांसी
- सांस लेने में तकलीफ, खासकर शारीरिक गतिविधियों के दौरान
- सांस लेते समय घरघराहट या सीटी जैसी आवाज आना
- काफी मात्रा में बलगम आना
- सीने में जकड़न या भारीपन
- ऊर्जा की कमी या बहुत थकान महसूस होना
- बार-बार फेफड़ों में संक्रमण होना
- वजन का घटना
- सुबह के समय सिरदर्द होना
टीबी के लक्षण
- दो सप्ताह से अधिक खांसी
- खांसी में खून आना
- सीने में दर्द
- शाम को बुखार आना
- वजन कम होना
- भूख में कमी
- रात में पसीना आना
- कमजोरी और थकान
- सांस लेने में तकलीफ
सीओपीडी और टीबी से बचाव
- धूम्रपान बंद कर दें
- भोजन बनाने के लिए चूल्हे का प्रयोग न करें
- घर के आसपास सफाई रखें
- हाथों का बार बार धोएं
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाते समय मास्क पहनें
- खांसते छींकते समय मुंह पर कपड़ा रखें
- दूसरे के प्रयोग किए गए तौलिए, रुमाल और तकिए का प्रयोग न करें
- बर्तनों, गिलास और पानी की बोतल को साझा न करें।
- घर और आसपास सफाई रखें
- टीबी की दवा का पूरा काेर्स करें
- अगर दो सप्ताह से अधिक खांसी है तो चिकित्सक को दिखाएं
- प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के घर के बने भोजन, हरी सब्जियों, मौसमी फलों का सेवन करें।