फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Even after cabinet proposal government order for reorganization of the language institution was not issued

Uttarakhand: कैबिनेट प्रस्ताव के बाद भी नहीं हुआ भाषा संस्था के पुनर्गठन का शासनादेश, इस तरह से है चल रहा

Thu, 19 Sep 2024 12:31 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Thu, 19 Sep 2024 12:31 PM IST
सार

धामी मंत्रिमंडल ने इसी साल 14 फरवरी को भाषा संस्थान एवं अकादमियों के विभागीय ढांचे के पुनर्गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, लेकिन इसका शासनादेश न होने से संस्थान में सहायक निदेशक, प्रकाशन अधिकारी, शोध अधिकारी समेत 42 अधिकारियों, कर्मचारियों के पद सृजित नहीं हो पाए हैं।

विज्ञापन
Even after cabinet proposal government order for reorganization of the language institution was not issued
मीटिंग ( फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्थानीय बोली भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बने भाषा संस्थान के ढांचे का पुनर्गठन होना है, लेकिन धामी मंत्रिमंडल के इसके प्रस्ताव को मंजूरी देने के सात महीने बाद भी इसका शासनादेश नहीं हुआ। यही वजह है कि संस्थान स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति न होने से पीआरडी और उपनल के 14 अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है।

विज्ञापन


उत्तराखंड भाषा संस्थान का न अपना मुख्यालय भवन है, न ही वर्षों बाद इसमें स्थायी कर्मचारियों और अधिकारियों की नियुक्ति हो पाई है। धामी मंत्रिमंडल ने इसी साल 14 फरवरी को भाषा संस्थान एवं अकादमियों के विभागीय ढांचे के पुनर्गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी, लेकिन इसका शासनादेश न होने से संस्थान में सहायक निदेशक, प्रकाशन अधिकारी, शोध अधिकारी समेत 42 अधिकारियों, कर्मचारियों के पद सृजित नहीं हो पाए हैं।
विज्ञापन


हालांकि, भाषा संस्थान की ओर से संस्थान में अधिकारियों, कर्मचारियों के 52 पद सृजित करने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन कैबिनेट ने 42 पद सृजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि संस्थान में स्थायी अधिकारी, कर्मचारी मिलते तो स्थानीय बोली, भाषा को बढ़ावा देने के काम को गति मिलती। विभागीय सचिव विनोद प्रसाद रतूड़ी के मुताबिक, कैबिनेट से जिस प्रस्ताव को मंजूरी मिली, वह अभी वित्त में हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

ये भी पढ़ें...Badrinath Dham:  आस्था पथ पर तकलीफ झेल रहे यात्री, दरक रही पहाड़ी, 25 साल बाद पर्थाडीप में फिर भूस्खलन सक्रिय

 

उधर, भाषा संस्थान की निदेशक स्वाति भदौरिया के मुताबिक, भाषा संस्थान में स्थायी कर्मचारी न होने से पीआरडी और उपनल के अस्थायी कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। कहा, हालांकि, संस्थान में उप निदेशक व वित्त अधिकारी का भी पद हैं, लेकिन उन्हें इसका अतिरिक्त प्रभार मिला हुआ है। कहा, शासनादेश होने के बाद संस्थान को स्थायी कर्मचारी और अधिकारी मिलेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed