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पंचेश्वर बांध निर्माणः बात पर्यावरण के मुद्दे पर, गिना रहे हैं विस्थापन का पैकेज

Sun, 13 Aug 2017 10:11 AM IST
कालिका रावल/ अमर उजाला, पिथौरागढ़
कालिका रावल/ अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sun, 13 Aug 2017 10:11 AM IST
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environment ignores in pancheshwar bridge construction
पंचेश्वर में इसी जगह प्रस्तावित है बांध। - फोटो : अमर उजाला

पंचेश्वर बांध के पर्यावरणीय प्रभाव की जन सुनवाई में बांध निर्माण से जुड़ी एजेंसियां के एजेंडे में भी बांध से प्रभावित पर्यावरण का मुद्दा नहीं है। बांध निर्माण से जुड़ा पक्ष भी जन सुनवाई में मुआवजे, प्रभावित क्षेत्र की योजनाओं की जानकारी देना ही मुनासिब समझ रहे हैं।

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यह तो कहा जा रहा है कि पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम से कम करने के लिए दस हजार करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, लेकिन यह नहीं बताया जा रहा है कि बांध निर्माण से पर्यावरण किस हद तक प्रभावित हो रहा है। ऐसे में लोग भी मुआवजे, विस्थापन के मुद्दे को उठाना बेहतर समझ रहे हैं। 
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शुक्रवार को जिला मुख्यालय में हुई उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की पर्यावरणीय जन सुनवाई की शुरुआत वाप्कोस कंपनी के एक अधिकारी ने बांध के पर्यावरणीय प्रभाव के स्थान पर परियोजना बनने से मिलने वाली सुविधाओं की जानकारियां लोगों को दी।
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पंचेश्वर बांध प्राधिकरण के अधिकारियों ने भी प्रभावितों को भूमि, घर, मुआवजा, हेलीपैड, रोपवे, वाटर स्पोर्ट्स जैसी सुविधाओं के बारे में बताया, जबकि उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सोमपाल सिंह ने भी डूब क्षेत्र में आने वाले लोगों को मिलने वाली सुविधाओं का ही बखान किया।

उन्होंने इतना भर बताया कि 33000 करोड़ रुपये लागत की परियोजना में 10866 करोड़ पर्यावरण प्रबंधन के लिए रखे गए हैं। जन सुनवाई में पर्यावरण के मुद्दे पर बात न होने का नतीजा ही है कि डूब क्षेत्र में आने वाले लोग भी असल मुद्दे से हटकर मुआवजा, विस्थापन जैसे मुद्दों में उलझ गए। 

झील से घिर जाएगा पिथौरागढ़
बांध से पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर पिथौरागढ़ की हरेला संस्था ने रिपोर्ट तैयार की है। हरेला संस्था के मनोज मठवाल जन सुनवाई में इस मुद्दे को उठाने वाले अकेले व्यक्ति थे। मठवाल का कहना है कि बांध बनने पर पिथौरागढ़ झील से घिर जाएगा। झीलों से मीथेन नामक गैस निकलेगी, जो वातावरण को तेजी के गर्म करेगी। अतिवृष्टि की घटनाएं बढ़ने लगेंगी। मौसम में बदलाव आएगा। जंगल डूबेंगे, स्तनधारी जीव, सरीसृप, पक्षी आदि समाप्त हो जाएंगे।


रणनीति के तहत नहीं होने दी जा रही है पर्यावरण पर चर्चा
सोची, समझी रणनीति के तहत पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा नहीं होने दी जा रही है। यह गंभीर चिंता का विषय है। अल्मोड़ा के धौलादेवी में 17 अगस्त को होने वाली पर्यावरणीय स्वीकृति की जन सुनवाई में पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव पर लोगों की चिंता सामने आनी चाहिए। 
- पूर्व विधायक उत्तराखंड क्रांति दल के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी

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