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पदमश्री रस्किन बांड का 88वां जन्मदिन सादगी के साथ मनाया गया ,परिवार के साथ घर में केक काटकर मनाया जन्मदिन
Fri, 20 May 2022 12:22 PM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 20 May 2022 12:22 PM IST
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पदमश्री रक्सिन बांड का 88वां जन्मदिन सादगी के साथ मनाया गया
- फोटो : MUSSOORIE
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अंग्रेजी लेखक पद्मभूषण रस्किन बांड ने अपना 88वां जन्मदिन घर पर परिवार के बीच सादगी के साथ मनाया। परिजनों ने केक काटकर बांड को जन्मदिन की बधाई दी। रस्किन बांड ने प्रशंसकों को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के लिए शुक्रिया अदा किया।
बाल साहित्यकार, उपन्यासकार पद्मभूषण रस्किन बांड ने अपना 88वां जन्मदिन लंढौर के मलिंगार छावनी रोड स्थित घर पर सादगी से मनाया। परिजन राकेश बांड ने बताया कि घर में परिवार संग रस्किन बांड ने केक काटा। कहा कि रस्किन बांड स्वस्थ हैं और आज भी लेखन कार्य जारी रखे हुए हैं। रस्किन बांड ने लाखों प्रशंसकों को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के लिए आभार जताया। राकेश ने बताया कि सुबह से ही रस्किन बांड के प्रशंसक घर पर पहुंचने शुरू हो गए थे।
बताया कि देर शाम तक पांच केक अलग-अलग काटे गए। रस्किन बांड ने प्रशंसकों के साथ फोटो भी खिंचवाई। बताया कि जन्मदिन के मौके पर स्पेशल खाना बनाया गया। रस्किन बांड के लिए बिरयानी भी बनाई गई। उनको खाने में सभी चीजें पसंद हैं। इस मौके पर सिद्धार्थ, श्रृष्टि, वैष्णवी आदि मौजूद थे।
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हिमाचल के सोलन में पैदा हुए थे रस्किन
रस्किन बांड का जन्म 19 मई वर्ष 1934 को हिमाचल प्रदेश के सोलन में हुआ था। उनके पिता ब्रिटिश रॉयल एयरफोर्स में थे। उनकी पढ़ाई शिमला के बिशप कॉटन स्कूल में हुई। रस्किन वर्ष 1964 में पहली बार मसूरी आए थे। इसके बाद यहीं के होकर रह गए। यहां पर उन्होंने कई उपन्यास लिखे। इनमें द ब्लू अंब्रेला, एक था रस्टी कहानी पर टीवी शो बना था। उनकी किताब ‘सुजैन सेवेन हसबैंड’ पर फिल्म ‘सात खून माफ बनी थी’। रस्किन के पहले उपन्यास द रूम ऑन द रूफ को वर्ष 1957 में जॉन लेवलिन राइस पुरस्कार मिला था। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है। बच्चों के लिए सैकड़ों कथाएं, निबंध और उपन्यास लिख चुके हैं। वर्ष 1999 में पद्मश्री और 2014 में पद्मभूषण मिल चुका हैं।
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बाल साहित्यकार, उपन्यासकार पद्मभूषण रस्किन बांड ने अपना 88वां जन्मदिन लंढौर के मलिंगार छावनी रोड स्थित घर पर सादगी से मनाया। परिजन राकेश बांड ने बताया कि घर में परिवार संग रस्किन बांड ने केक काटा। कहा कि रस्किन बांड स्वस्थ हैं और आज भी लेखन कार्य जारी रखे हुए हैं। रस्किन बांड ने लाखों प्रशंसकों को जन्मदिन की शुभकामनाएं देने के लिए आभार जताया। राकेश ने बताया कि सुबह से ही रस्किन बांड के प्रशंसक घर पर पहुंचने शुरू हो गए थे।
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बताया कि देर शाम तक पांच केक अलग-अलग काटे गए। रस्किन बांड ने प्रशंसकों के साथ फोटो भी खिंचवाई। बताया कि जन्मदिन के मौके पर स्पेशल खाना बनाया गया। रस्किन बांड के लिए बिरयानी भी बनाई गई। उनको खाने में सभी चीजें पसंद हैं। इस मौके पर सिद्धार्थ, श्रृष्टि, वैष्णवी आदि मौजूद थे।
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हिमाचल के सोलन में पैदा हुए थे रस्किन
रस्किन बांड का जन्म 19 मई वर्ष 1934 को हिमाचल प्रदेश के सोलन में हुआ था। उनके पिता ब्रिटिश रॉयल एयरफोर्स में थे। उनकी पढ़ाई शिमला के बिशप कॉटन स्कूल में हुई। रस्किन वर्ष 1964 में पहली बार मसूरी आए थे। इसके बाद यहीं के होकर रह गए। यहां पर उन्होंने कई उपन्यास लिखे। इनमें द ब्लू अंब्रेला, एक था रस्टी कहानी पर टीवी शो बना था। उनकी किताब ‘सुजैन सेवेन हसबैंड’ पर फिल्म ‘सात खून माफ बनी थी’। रस्किन के पहले उपन्यास द रूम ऑन द रूफ को वर्ष 1957 में जॉन लेवलिन राइस पुरस्कार मिला था। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है। बच्चों के लिए सैकड़ों कथाएं, निबंध और उपन्यास लिख चुके हैं। वर्ष 1999 में पद्मश्री और 2014 में पद्मभूषण मिल चुका हैं।