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Dehradun News: इलेक्ट्रिसिटी बिल के लिए गठित वर्किंग ग्रुप पर इंजीनियरों ने जताई आपत्ति
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-कर्मचारियों व इंजीनियरों को शामिल न करने पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की ओर से इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने के लिए गठित वर्किंग ग्रुप पर गंभीर आपत्ति दर्ज की है। फेडरेशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट के आधार पर बिल को संसद में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया तो देशभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि 30 जनवरी को केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की ओर से एक आदेश जारी कर गुपचुप तरीके से वर्किंग ग्रुप का गठन किया गया है। आदेश के अनुसार, वर्किंग ग्रुप को गठन के मात्र 14 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है, जो कि इतने महत्वपूर्ण और व्यापक प्रभाव वाले विषय के लिए अत्यंत जल्दबाजी को दर्शाता है। फेडरेशन ने विशेष आपत्ति जताई है कि इस वर्किंग ग्रुप में ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल को शामिल किया गया है। यह संस्था सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत एक निजी संगठन है। इसके कई पदाधिकारी सार्वजनिक रूप से वितरण क्षेत्र के निजीकरण की वकालत करते रहे हैं।
फेडरेशन का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र सरकार इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल को जल्दबाजी में अंतिम रूप देकर संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में प्रस्तुत करना चाहती है, जिसे देश के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे। यदि कर्मचारियों और इंजीनियरों की आशंकाओं की अनदेखी करते हुए बिल को आगे बढ़ाया गया, तो इसके विरुद्ध देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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देहरादून। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की ओर से इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने के लिए गठित वर्किंग ग्रुप पर गंभीर आपत्ति दर्ज की है। फेडरेशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट के आधार पर बिल को संसद में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया तो देशभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि 30 जनवरी को केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की ओर से एक आदेश जारी कर गुपचुप तरीके से वर्किंग ग्रुप का गठन किया गया है। आदेश के अनुसार, वर्किंग ग्रुप को गठन के मात्र 14 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है, जो कि इतने महत्वपूर्ण और व्यापक प्रभाव वाले विषय के लिए अत्यंत जल्दबाजी को दर्शाता है। फेडरेशन ने विशेष आपत्ति जताई है कि इस वर्किंग ग्रुप में ऑल इंडिया डिस्कॉम्स एसोसिएशन के डायरेक्टर जनरल को शामिल किया गया है। यह संस्था सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत एक निजी संगठन है। इसके कई पदाधिकारी सार्वजनिक रूप से वितरण क्षेत्र के निजीकरण की वकालत करते रहे हैं।
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फेडरेशन का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि केंद्र सरकार इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल को जल्दबाजी में अंतिम रूप देकर संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में प्रस्तुत करना चाहती है, जिसे देश के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे। यदि कर्मचारियों और इंजीनियरों की आशंकाओं की अनदेखी करते हुए बिल को आगे बढ़ाया गया, तो इसके विरुद्ध देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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