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बुंदेलखंड में बीहड़ बनने से पहले रहते थे गजराज
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 09 Oct 2016 11:57 AM IST
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elephant
- फोटो : demo pic
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सीमांत गंगा मैदान के दायरे में चंबल और धसान के बेसिन में जहां आज बीहड़ हैं, वहां कभी एलीफस नेमेडिक स हाथी का आशियाना रहा है।
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अब ये हाथी दुनिया से विलुप्त हो गए हैं। बुंदेलखंड के हमीरपुर और जालौन में इन हाथियों के अवशेष मिले हैं। 56 हजार साल पहले यहां एलीफस के रहने की पहली बार पुष्टि हुई है। इन्हीं हाथियों के अवशेष उत्तराखंड की शिवालिक पहाड़ियों में भी पाए गए हैं।
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बुंदेलखंड के कालपी (जालौन) और हमीरपुर जिले में वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों की टीम को एलीफस नेमेडिकस हाथी के जबड़े, सिर की टूटी हड्डियां और पिछले दांत मिले हैं।
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जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद कार्बन डेटिंग कराई गई तो ये जीवाश्म 56 हजार साल पुराने निकले। इससे यह तय हो गया कि जब ये हाथी यहां विचरण करते थे तो इन इलाकों में बीहड़ नहीं थे। विज्ञानियों का अंदाजा है कि यहां बीहड़ 50 हजार साल पुराने हैं। एलीफस हाथी बीहड़ बनने से पहले यहां रहते थे।
इन हाथियों के खत्म होने के बाद बीहड़ बनने का सिलसिला शुरू हुआ। हाथियों के जीवाश्म की खोज में जुटे विज्ञानियों को यहां मध्य पाषाण काल में मनुष्यों के रहने के भी साक्ष्य मिले हैं। विज्ञानियों को यहां मध्य पाषाण काल के पत्थरों के हथियार मिले हैं।
इन हथियारों का इस्तेमाल लोग अपनी रक्षा और शिकार के लिए करते रहे होंगे। एलीफस नेमेडिकस हाथी उत्तराखंड के शिवालिक में भी रहते रहे हैं। यहां पिंजौर एरिया की चट्टानों पर एलीफस हाथियों के जीवाश्म मिले हैं। यह माना जा रहा है कि एलीफस हाथियों का विचरण यूपी और उत्तराखंड का गंगा बेसिन रहा है।
हमीरपुर, कालपी (जालौन) में एलीफस नेमेडिकस हाथी के अवशेष मिले हैं। हाथियों की यह प्रजाति विलुप्त हो गई है। जीवाश्मों से पहली बार इस क्षेत्र में इस प्रजाति की पहचान हुई है।
- डॉ. प्रदीप श्रीवास्तव, वरिष्ठ विज्ञानी, वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान