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Uttarakhand: लगातार बढ़ रही ऊर्जा जरूर, कोयले से बिजली के लिए ऊर्जा मंत्रालय ने कोयला मंत्रालय को भेजा पत्र

Fri, 07 Jun 2024 11:26 AM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 07 Jun 2024 11:26 AM IST
सार

कोयले से बिजली उत्पादन करने के लिए केंद्र सरकार से कोयला उपलब्धता को लेकर प्रस्ताव भेजा था। ऊर्जा मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को कोयला मंत्रालय के पास भेज दिया है ताकि उसी हिसाब से कोयले की उपलब्धता हो सके।

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Electricity Uttarakhand News Ministry of Energy sent a letter to Ministry of Coal for electricity from coal
electricity - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लगातार बढ़ रही ऊर्जा जरूरतों के बीच अब उत्तराखंड सरकार 1320 मेगावाट का पिटहेड थर्मल पावर प्लांट लगाने की तैयारी में है। इसके लिए सरकार ने केंद्र को पत्र भेजा था। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने पत्र कोयला मंत्रालय को भेज दिया है। जहां भी कोयले की खदान मिलेगी, वहीं सरकार थर्मल प्लांट लगाएगी। इससे बिजली किल्लत काफी हद तक कम हो जाएगी।

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उत्तराखंड ने बिजली की मांग के सापेक्ष उत्पादन काफी कम होने के चलते कोयले से बिजली बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इसके लिए टीएचडीसी-यूजेवीएनएल का संयुक्त उपक्रम बनाया गया। उपक्रम ने कोयले से बिजली उत्पादन करने के लिए केंद्र सरकार से कोयला उपलब्धता को लेकर प्रस्ताव भेजा था। ऊर्जा मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को कोयला मंत्रालय के पास भेज दिया है ताकि उसी हिसाब से कोयले की उपलब्धता हो सके।

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यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक डॉ. संदीप सिंघल का कहना है कि जहां भी कोयला मिलेगा, वहीं पिटहेड थर्मल पावर प्लांट बनाया जाएगा। इससे कोयले की सप्लाई पर होने वाले खर्च से बचा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि कोल ब्लॉक मिलने के बाद चार से पांच साल में प्लांट तैयार हो जाएगा। जिसके बाद 1320 मेगावाट बिजली उपलब्धता बढ़ जाएगी।

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सीजन में प्रभावित रहता है उत्पादन

राज्य में जो जल विद्युत परियोजनाएं हैं, उनका उत्पादन सीजन के हिसाब से प्रभावित होता है। पहाड़ों में बर्फबारी होने के बाद नदियों में पानी का स्तर गिरने से उत्पादन घट जाता है। बरसात में नदियों में सिल्ट आने की वजह से उत्पादन घट जाता है। इसी प्रकार, सौर ऊर्जा भी केवल दिनभर में ही उपलब्ध होती है। ऐसे में थर्मल पावर का विकल्प सरकार को मजबूत लग रहा है।

 

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