बिजली का सेंसेक्स चढ़ा तो लगे झटके
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बिजली का सेंसेक्स चढ़ते ही शुक्रवार को प्रदेश एक बार फिर कटौती से जूझने लगा। दोपहर में दाम सात रुपए प्रति यूनिट तक पहुंचते ही उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने बिजली खरीद से हाथ खड़े कर दिए।
शाम को दो रुपए की गिरावट आने के बाद ही इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से शनिवार के लिए तीस लाख यूनिट बिजली खरीदी गई। इस बीच प्रदेश में कम बिजली उत्पादन ने संकट और बढ़ाए रखा।
जलविद्युत गृहों से कम उत्पादन होने से शुक्रवार को प्रदेश के कई क्षेत्रों में चार घंटे तक कटौती हुई। यूपीसीएल ने शनिवार के लिए हरियाणा से 75 मेगावाट और जम्मू कश्मीर से 100 मेगावाट बिजली बुक कर ली है। यह बिजली यूपीसीएल प्रदेश में उत्पादन बढ़ने पर लौटाएगा।
आंकड़ों पर नजर
प्रदेश में विद्युत मांग: तीन करोड़ 36 लाख 80 हजार यूनिट
उपलब्धता: तीन करोड़ दस लाख दस हजार यूनिट
कहां कितनी कटौती
ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्र: चार घंटे
हरिद्वार जिले के ग्रामीण क्षेत्र: चार घंटे
गढ़वाल मंडल के छोटे शहर: ढाई घंटे
कुमाऊं मंडल के छोटे शहर: ढाई घंटे
रुड़की, हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर: दो घंटे
नान कंटिनुअस इंडस्ट्री कुमाऊं: ढाई घंटे
नान कंटिनुअस इंडस्ट्री गढ़वाल: ढाई घंटे
सिडकुल पंतनगर और सिडकुल हरिद्वार: चार घंटे
राज्य के पहाड़ी क्षेत्र: डेढ़ घंटे
मनेरी भाली प्रथम से उत्पादन शुरू
एक महीने से बंद उत्तराखंड जलविद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनल) के मनेरी भाली-प्रथम जलविद्युत गृह से शुक्रवार शाम चार बजे बिजली उत्पादन शुरू हो गया। कालागढ़ और खटीमा में शुक्रवार को भी उत्पादन ठप रहा। उधर, मनेरी भाली-द्वितीय से शाम चार बजे तक 150 मेगावाट बिजली मिल रही थी, इसके बाद उत्पादन घटकर 70 मेगावाट पर पहुंच गया।
अक्तूबर 2013 में यूपीसीएल को यूजेवीएनएल के जलविद्युत गृहों से करीब एक करोड़ 40 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन मिलता था। इस साल सिर्फ 1.10 करोड़ यूनिट प्रतिदिन मिल रही है।
-मधुसूदन, प्रवक्ता, यूपीसीएल
नदियों में जलस्तर लगातार कम हो रहा है। इससे प्रदेश के जलविद्युत गृहों में विद्युत उत्पादन में भी कमी आई है। इससे जुड़े तकनीकी पक्ष का ब्यौरा मुख्य सचिव के समक्ष भी रखा गया है।
-जीपी पटेल, एमडी, यूजेवीएनल