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संकट: महंगी बिजली खरीद का दर्द लेकर नियामक आयोग पहुंचा यूपीसीएल, टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव की तैयारी

Tue, 10 May 2022 03:01 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 10 May 2022 03:01 PM IST
सार

वर्तमान हालात बरकरार रहे तो निगम को तीन माह में ही एक हजार करोड़ की बिजली खरीदनी पड़ेगी। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की वजह से आयोग से राहत मिलने के आसार कम है। यूपीसीएल टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव की तैयारी कर रहा है।

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electricity Problem, UPCL upset due to expensive power purchase, reached  regulatory commission with matter
बिजली संकट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारी डिमांड और कम उपलब्धता के बीच रोजाना 12 से 15 करोड़ रुपये की बिजली खरीदने से घाटे की ओर बढ़ रहा ऊर्जा निगम अब अपना दर्द लेकर नियामक आयोग पहुंचा है। निगम ने आयोग के सामने अप्रैल-मई और जून की बिजली की मांग और कमी को पूरा करने के लिए खर्च होने वाले बजट का आंकड़ा भी पेश किया है। हालांकि आयोग से राहत मिलने के कम आसार हैं।

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दरअसल, प्रदेश में बिजली की डिमांड लगातार 45 से 49 मिलियन यूनिट तक पहुंच रही है। इसके सापेक्ष ऊर्जा निगम को बाजार से औसत 9.48 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदनी पड़ रही है। यूपीसीएल के डायरेक्टर प्रोजेक्ट्स अजय कुमार अग्रवाल की ओर से भेजे गए पत्र में पूरा हिसाब किताब बताया गया है।
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इसमें कहा गया है कि पिछले साल एक अप्रैल से 30 जून के बीच यूपीसीएल ने 3.34 रुपये प्रति यूनिट की औसत दर पर 151.86 करोड़ रुपये से 454.13 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी थी। इस साल जितनी डिमांड चल रही है, उस हिसाब से इन तीन महीने में निगम को 951.46 मिलियन यूनिट बिजली औसत 11.41 रुपये के दाम पर 1085.68 करोड़ रुपये खर्च करके खरीदनी पड़ेगी।

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वित्तीय वर्ष में केवल एक बार ही टैरिफ हो सकता है रिवाइज

यूपीसीएल का मकसद है कि बिजली आपूर्ति के इस घाटे को दूर करने की दिशा में कोई प्रयास किया जाए। इसके लिए जल्द ही यूपीसीएल विद्युत दरों का टैरिफ रिवाइज करने को लेकर पिटीशन भी दायर करने जा रहा है। हालांकि इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 के तहत यह प्रावधान है कि वित्तीय वर्ष में केवल एक बार ही टैरिफ रिवाइज हो सकता है। लिहाजा, यूपीसीएल को कोई राहत मिलेगी, इसकी उम्मीद कम है।

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यह है यूपीसीएल की महंगी बिजली का गणित

माह  2021-22  2022-23
1-26 अप्रैल 95.21 करोड़ 210.88 करोड़
27-30 अप्रैल 14.65 करोड़  60 करोड़
मई  23.85 करोड़ 572.40 करोड़
जून  18.16 करोड़  242.40 करोड़ 
कुल  151.86 करोड़ 1 085.68 करोड़ 


नोट : मई-जून के आंकड़े अनुमानित हैं।

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