बीजेपी का महाराज कनेक्शन उड़ाएगा कांग्रेस का 'फ्यूज'
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अन्य राज्यों में भाजपा का प्रचार कर लौटे सतपाल महाराज की असली परीक्षा उत्तराखंड में है।
महाराज ने वापसी करते ही पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के साथ सीएम हरीश रावत के खिलाफ मोर्चा खोल माहौल गर्माना शुरू कर दिया है।
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प्रदेश की पांचों लोकसभा सीटों में महाराज चुनावी सभाएं तो करेंगे लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती पौड़ी संसदीय सीट रहेगी।
28 अप्रैल के बाद राज्य में मोदी सहित अन्य राष्ट्रीय नेतृत्व के पहुंचने तक महाराज नैनीताल और टिहरी लोकसभा सीट पर फोकस कर रहे हैं।
अब सतपाल देंगे कांग्रेस के झटका
महाराज के भाजपा में जाने के कांग्रेस भले कोई बड़ा नुकसान नहीं मान रही है, लेकिन अब उनके चुनाव प्रचार में सक्रिय होने से असर दिखेगा।
महाराज अब तक भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के संपर्क बना कर चल रहे हैं अब पहली बार उनका प्रदेश नेतृत्व से तालमेल देखने को मिलेगा।
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भाजपा ने महाराज से उम्मीद लगा रखी है कि वह कांग्रेस के कुछ गढ़ों में सेंधमारी कर पार्टी को फायदा पहुंचाएंगे। महाराज अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों के अलावा अपने करीबी विधायकों और मंत्रियों को सक्रिय करेंगे।
हरक सिंह को उठाना होगा नुकसान
महाराज के करीबी विधायक भले राजनीतिक मंच पर कांग्रेस के साथ दिख रहे हैं, लेकिन उनका भीतर से समर्थन महाराज को रहेगा।
पौड़ी संसदीय सीट पर महाराज का सर्वाधिक प्रभाव रहेगा, जिसका नुकसान वहां से कांग्रेस प्रत्याशी हरक सिंह को उठाना होगा।
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हालांकि यह भी देखना लायक रहेगा कि जनरल खंडूड़ी के खिलाफ कई बार चुनाव लड़ चुके महाराज इस बार उनके पक्ष में आकर किस कदर तालमेल बैठाते हैं।
हरिद्वार और नैनीताल सीट पर चुनौती कम नहीं
पौड़ी के बाद महाराज के लिए हरिद्वार और नैनीताल सीट भी किसी चुनौती से कम नहीं है। यहां उनका अच्छा रसूख माना जाता है, जिसका फायदा भाजपा लेना चाहती है।
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महाराज ने प्रदेश में अपने प्रचार अभियान की शुरूआत भी नैनीताल से की है। इसके बाद वह टिहरी जाएंगे जहां उनको पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के खिलाफ प्रचार करना है।
बहुगुणा सरकार से महाराज के तालमेल अच्छे माने जाते रहे हैं। हालांकि आपदा के बाद कुछ खटास जरूर आई थी।