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लोकतंत्र की खातिर हो रहा करोड़ों का तमाशा
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 05 May 2014 01:13 PM IST
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लोकतंत्र के पर्व का जश्न देहरादून में जोरशोर से मनाया जा रहा है।
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चुनाव प्रचार सामग्री कहें या शामियाने, कुर्सी, कैंटर, इलेक्ट्रिकल आर्डर मार्केट सभी ने तकरीबन 15 दिन के सफर में खासा बूम देखा है।
तकरीबन 25 करोड़ रुपए का कारोबार
हालांकि कोई अधिकृत डाटा नहीं है, लेकिन व्यापारियों के अनुमान की मानें तो अकेले प्रचार सामग्री से ही तकरीबन 25 करोड़ रुपए का कारोबार हो चुका है।
वह भी तब, जबकि कांग्रेस और भाजपा जैसी पार्टियों की सामग्री केंद्रीय कार्यालय से पहुंची है। केवल झंडी, बैनर, टोपी, स्टिकर, पटके, क्लिप, पेन जैसी चीजों की ही खरीद लाखों में हुई है।
गांधी रोड स्थित चुनाव प्रचार सामग्री विक्रेता मजहर सिद्दीकी आंकड़े का खुलासा नहीं करते, लेकिन बताते हैं कि सबसे ज्यादा खरीदारी कांग्रेस ने की है।
बीजेपी ने भी नरेंद्र मोदी की टोपी, पटका, बटन जैसी चीजें खरीदी हैं। यूकेडी जैसी स्थानीय पार्टी ने भी झंडी, बैनर टोपी पर जोर लगाया है।
निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी प्रचार सामग्री के लिए हाथ खोले हैं। भीड़ जुटाने से लेकर इमेज बिल्डिंग वाली पीआर एजेंसियों, आयोजन पर हो रहे खर्चे का आकलन खासा है।
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खूब चमक रहा चंदे का धंधा
चुनाव में चंदे का धंधा भी खूब चमक रहा है। चंदा केवल नगदी के रूप में ही नहीं दिया जा रहा है, बल्कि परोक्ष रूप से भी भेंट चढ़ाया जा रहा है।
बैठकों, सभाओं के आयोजन के लिए होटल, वेडिंग प्वाइंट तक या तो मुफ्त या बहुत कम शुल्क पर दिए जा रहे हैं। पार्टी, प्रत्याशी के जीतने के बाद काम निकलवाने या पद पाने की आकांक्षा इसके पीछे बड़ा कारण है।
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पार्टी फंड में चंदा करने वाले अलग हैं। कुछ तो केवल प्रत्याशी के नाम पर भेंट चढ़ा रहे हैं। पलटन बाजार के एक छोटे व्यापारी ने तीन लाख रुपए का चंदा पसंदीदा एक प्रत्याशी के नाम दिया है।
पार्टी जीत गई तो उनके कई रुके काम बनेंगे। अगर पार्टी नहीं जीती तो? के सवाल पर वह कहते हैं कि छोटा-मोटा पद तो चंदे के बहाने मिल ही जाएगा।