उत्तराखंड: इन स्कूलों के आठ शिक्षकों की बर्खास्तगी तय, चार की पेंशन रोकी, जानिए पूरा मामला
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फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने के आरोपी आठ शिक्षकों पर बर्खास्तगी की तलवार लटक गई है। साथ ही सेवानिवृत्त हो चुके चार शिक्षकों की पेंशन रोकने की संस्तुति की गई है।
फर्जी प्रमाणपत्रों से शिक्षकों की भर्ती होने का खुलासा होने के बाद एसआईटी को जांच सौंपी गई है। एसआईटी ने हरिद्वार जनपद के 351 शिक्षकों के मूल शैक्षिक प्रमाणपत्र और भर्ती के दस्तावेज मांगे थे।
इनमें 2014 में भर्ती हुए 12, 2016 के 288 शिक्षकों के साथ वर्ष 2002 से पूर्व के 51 शिक्षकों के दस्तावेज मांगे थे। वर्ष 2014 और 16 के शिक्षकों के समस्त दस्तावेज मिल गए थे। 2002 से पूर्व के 51 शिक्षकों में से 12 शिक्षकों ने अपने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।
समाचार पत्रों में 20 सितंबर को विज्ञापन प्रकाशित कर 27 सितंबर तक अपने मूल दस्तावेज जमा करने को कहा गया था। अब इन 12 शिक्षकों ने निर्धारित तिथि 27 सितंबर को अपने मूल दस्तावेज विभाग को उपलब्ध नहीं कराए और साथ ही कोई संपर्क भी नहीं किया।
यह हैं आरोपी शिक्षक
इन 12 शिक्षकों में से चार शिक्षक पहले से ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं और 8 शिक्षक अपने नियत स्कूलों में ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं। इन आरोपी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर दी है।
यह हैं आरोपी शिक्षक
बहादराबाद ब्लाक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय गुर्जर बस्ती गैंडीखाता से जगराम सिंह, मिठीबेरी के विपिन प्रकाश शर्मा, बौंगला के महिपाल सिंह, गैंडीखाता गुर्जर बस्ती के हरपाल सिंह, मंगोलपुरा के रामपाल सिंह, हजाराग्रंट से नागेंद्र सिंह हैं। लक्सर ब्लाक के मुंडाखेड़ा के ब्रहमपाल सिंह, नंदपुर के जगपाल सिंह, चिड़ियापुर स्कूल के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके छिदा सिंह, नरोजपुर के सेवानिवृत्त हो चुके रक्षपाल, डूंगरपुर के सेवानिवृत्त हो चुकी स्नेहलता, बहादराबाद से सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षक चरण सिंह हैं।
सन 2002 से पूर्व में भर्ती हुए 12 शिक्षकों को 27 सितंबर का समय दिया था और चेतावनी जारी की थी, यदि नियत समय तक ये शिक्षक अपने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराते हैं तो इन्हें स्वत: ही बर्खास्त मान लिया जाएगा। जो शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके थे, उनकी पेंशन रोकने की संस्तुति कर दी गई है। संबंधित आदेश बृहस्पतिवार को जारी कर दिए जाएंगे।
- ब्रह्मपाल सिंह सैनी, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक हरिद्वार