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यहां बच्चों ने कभी नहीं देखा स्कूल
ओमप्रकाश सती/ अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Tue, 09 Sep 2014 12:05 PM IST
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उत्तराखंड सरकार और गैर सरकारी संस्थाओं के बड़े बड़े दावे। हर गरीब तक शिक्षा पहुंचाने का ढिंढोरा। दर्जनों योजनाएं, सैकड़ों प्रोजेक्ट। लेकिन किसी को नहीं पता कि इनसे किसके जीवन में शिक्षा का उजाला हो रहा है।
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शिक्षा पहुंचाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी?
हल्द्वानी के वार्ड-22 ढोलक बस्ती के बच्चों ने कभी स्कूल नहीं देखा। न मां बाप पढ़ न बच्चों को अक्षर ज्ञान मिला। आगे भी इन तक शिक्षा पहुंचाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है। सोमवार को विश्व साक्षरता दिवस है। इसका हाल जानने के लिए हम रेलवे स्टेशन के पास ढोलक बस्ती में गए।
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वहां तान साल से लेकर 15 साल तक के बच्चों और अन्य लोगों से बातचीत की। हैरानी की बात है कि वहां रहने वाला कोई बच्चा स्कूल नहीं जाता। कुछ छोटे बच्चे आंगनबाड़ी जाते हैं तो वह भी सिर्फ राशन मिलने वाले दिन।
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वहीं रहने वाले कलीम ने बताया कि पहले बस्ती के पास ही प्राइमरी स्कूल था। मगर अब दूर चला गया है। जिस कारण भी बच्चे वहां नहीं जा सकते। इसके अलावा बच्चों को स्कूल न भेजने के पीछे सबसे बड़ा कारण गरीबी है। स्कूल की फीस और अन्य खर्चे नहीं उठा सकते।
स्लम एरिया में बच्चों को पढ़ाने के नाम पर लाखों रुपए लेने वाले एनजीओ भी आज तक इस बस्ती में नहीं पहुंचे। वहां रहने वाले जुनैद (10) ने कभी स्कूल नहीं देखा।
दिखभर कूड़ा बीनता है। इसी तरह शाहबाज भी स्कूल नहीं जाता। अलीशाना (3) आंगनबाड़ी में जाती है वो भी राशन के लिए। इसी तरह वहां के सैकड़ों बच्चे शिक्षा से महरूम हैं।