उत्तराखंड: शिक्षा निधि से बांट रहे कर्मचारियों को वेतन
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सहकारिता के प्रचार-प्रसार के लिए बनी शिक्षा निधि को लेकर अब सवाल उठ खड़े हुए हैं। इस मामले को लेकर सहकारी संस्थाएं मोरचा खोलने की तैयारी में हैं। हद तो यह है कि निधि से सहकारिता के प्रचार-प्रसार की बजाय वेतन का भुगतान किया जाता रहा। अब सहकारी संस्थाएं इस निधि को डायवर्ट करने की शिकायत कर रही हैं। हालांकि, रजिस्ट्रार और सचिव सहकारिता विजय ढौंडियाल ने इससे इनकार किया है।
सहकारिता की शिक्षा निधि एक ऐसा फंड हैं, जिसमें विभिन्न सहकारी संस्थाएं अपने लाभ में से अंशदान करती हैं। 2003 से गठित इस निधि की अभी तक विभाग के पास ठीक-ठीक जानकारी नहीं है। इस निधि के संचालन के लिए गठित संयोजन समिति के अध्यक्ष प्रमोद कुमार सिंह ने ही अब निधि को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रमोद कुमार सिंह का कहना है कि आधा दर्जन पत्र व्यवहार करने के बाद भी न तो निधि के बैंक खाते की जानकारी दी जा रही है और न ही यह बताया जा रहा है कि बैंक में कितनी राशि है। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत भी आधी अधूरी जानकारी दी गई। बताया गया कि ट्रेनिंग सेंटर के कर्मचारियों का 2008-09 में 14 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। 2013 तक भी इस निधि से वेतन भुगतान किया जाता रहा।
अब सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों का आरोप है कि निधि को राज्य सहकारी परिषद का हस्तांतरित करने की तैयारी भी की जा रही है। हालांकि, निबंधक और सचिव सहकारिता विजय ढौंडियाल ने इससे साफ इनकार किया है। ढौंडियाल का कहना है कि न तो इस तरह का कोई प्रस्ताव है और न ही इस विषय पर कोई कदम उठाया गया है।
क्या कहती है 19 दिसंबर 2008 में जारी नियमावली
-नेशनल कोआपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया को अंशदान
-सहकारी समितियों के सदस्यों को शिक्षा
- सहकारी शिक्षा प्रसार के लिए
किसका कितना होगा अंशदान
- प्रारंभिक सहकारी समिति-5000 रुपये प्रति वर्ष
- जिला, केंद्रीय, नगरीय सहकारी बैंक-15000 रुपये प्रति वर्ष
- अन्य केंद्रीय समितियां-7000 रुपये प्रति वर्ष
- उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक-डेढ़ लाख प्रति वर्ष
- अन्य शीर्ष सहकारी समितियां-40 हजार रुपये प्रति वर्ष
-शिक्षा निधि के संचालन की जिम्मेदारी राज्य सहकारी संघ की है। संघ का अध्यक्ष होने के नाते मैं निधि के संचालन के लिए गठित समिति का अध्यक्ष भी हूं। इतना होने के बावजूद भी निधि के संचालन की जानकारी मुझे ही नहीं दी जा रही है। पिछले कई सालों से इसके लिए पत्र व्यवहार किया जा रहा है। सूचना के अधिकार के तहत भी जानकारी मांगी गई। अब निधि का अन्यत्र उपयोग करने की कोशिश की जा रही है। जिस काम के लिए निधि बनी है, उसी काम के लिए इसका उपयोग होना चाहिए।
- प्रमोद कुमार सिंह, अध्यक्ष, निधि संचालन उप समिति