शिक्षा विभाग : संबद्धता खत्म करने के शासनादेश के बावजूद मूल तैनाती छोड़ दफ्तरों में जमे हैं अधिकारी
अफसरों के लिए शासनादेश मायने ही नहीं रखता। तभी तो शिक्षा विभाग में तैनात कई अधिकारी शासनादेश को मानकर अपनी मनमर्जी से चल रहे हैं।
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संबद्धता खत्म करने के शासनादेश के बावजूद शिक्षा विभाग में कई अफसर मूल तैनाती की जगह जाने के लिए तैयार नहीं हैं। वे आदेश के बाद भी दून स्थित दफ्तरों में जमे हुए हैं। विभाग की और से एक उप शिक्षा अधिकारी को कोटाबाग, नैनीताल भेजा गया, लेकिन वे अभी तक एससीईआरटी देहरादून में काम कर रहे हैं।
इसी तरह धारचूला भेजे गए खंड शिक्षा अधिकारी अभी भी एससीईआरटी में जमे हुए हैं जबकि बागेश्वर भेजी गईं एक उप शिक्षा अधिकारी और शिक्षा निदेशालय एवं एससीईआरटी में कार्यरत एक प्रशासनिक अधिकारी समग्र शिक्षा विभाग में काम कर रहे हैं।
नैनीताल, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, हरिद्वार जिले में जूनियर अधिकारियों को प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी बनाया गया है जबकि पद न होने के बावजूद विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डायट चमोली, देहरादून, सिमल्टी रुद्रप्रयाग सहित विभिन्न डायट कार्यालय में तैनात हैं। प्रशासनिक संवर्ग होने के बावजूद इनकी यहां तैनाती की गई है। इसके अलावा चंपावत जिले में अब तक सीईओ की तैनाती नहीं हो पाई है।
प्रदेश के जिन जिलों में अधिकारियों के पद खाली हैं उन्हें एक सप्ताह के भीतर भरा जाएगा। अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संबद्धता के मसले पर विचार किया जाएगा। -डॉ.धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री