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सुगम से दुर्गम के फेर में विभाग का सिस्टम फ्यूज
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 15 Nov 2013 05:24 PM IST
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अनिवार्य तबादला नियमावली में संशोधन के बावजूद विभाग उत्तराखंड में सुगम में जमे शिक्षकों को पहाड़ नहीं चढ़ा पाया।
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चेतावनी के बाद भी नहीं हुआ समाधान
निलंबन की चेतावनी के बाद भी 291 से अधिक शिक्षकों ने अब तक नवीन तैनाती स्थलों पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया। हाल यह है कि शासन में बैठे अधिकारी और खुद शिक्षामंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी सिस्टम को पटरी पर नहीं ला पा रहे हैं।
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सालों से सुगम स्कूलों में जमे शिक्षकों को पहाड़ चढ़ाने के लिए अनिवार्य तबादला नियमावली लागू की गई थी। हालांकि, इसमें तमाम गड़बड़ियों के चलते वर्ष 2012 तबादला सत्र को शून्य घोषित कर दिया गया था। वहीं इस साल नियमावली में तीन बार संशोधन हो चुका है।
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विभाग ने 13 सितंबर को शिक्षकों के तबादले किए थे। दुर्गम से सुगम में आने वाले शिक्षकों ने तो पदभार ग्रहण कर लिया, लेकिन दुर्गम में शिक्षक नहीं गए।
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गढ़वाल मंडल में 10 प्रवक्ता और 13 एलटी सहायक अध्यापकों ने टिहरी, चमोली, पौड़ी व उत्तरकाशी जनपदों के दुर्गम स्कूलों में कार्यभार ग्रहण नहीं किया। वहीं कुमाऊं मंडल में ऐसे शिक्षकों की संख्या 15 है। वहीं, बेसिक में गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में 250 शिक्षक दुर्गम विद्यालयों में नहीं गए।
नियमावली में संशोधन
तबादला नियमावली में एक जुलाई, पांच जुलाई और पांच सितंबर को संशोधन किए गए। इसके तहत विकलांगता प्रतिशत में छूट को 70 फीसदी से घटाकर 50 फीसदी किया गया। साथ ही तबादले से छूट के लिए महिलाओं की आयु 52 वर्ष से घटाकर 50 वर्ष और दुर्गम में तबादलों के लिए शिक्षकों को पांच-पांच विकल्प दिए गए।
736 स्कूल क्षतिग्रस्त, ठिठुर रहे बच्चे
आपदा के दौरान प्रदेश के 736 स्कूल पूर्ण और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए थे। बच्चे कहीं पंचायत घर तो कही जर्जर हाल स्कूल भवनों में पढ़ रहे हैं। आपदा को चार महीने से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन स्कूल भवनों का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। विभाग अभी निर्माण से पूर्व होने वाली कार्यशालाओं में व्यस्त है।
सुगम के लिए मशक्कत
हाल ही में एलटी से प्रवक्ता पद पर 1383 शिक्षकों के प्रमोशन हुए। पहली बार कई शिक्षकों को सुगम में प्रमोशन दे दिए गए। जबकि जिन शिक्षकों के सुगम में प्रमोशन नहीं हुए वे पदोन्नति संशोधन के लिए विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
अनुपस्थित रहते हैं शिक्षक
कई बार चेतावनी के बावजूद शिक्षक स्कूलों से नदारद रहते हैं या फिर समय पर स्कूल नहीं पहुंच रहे। स्थिति यह है कि दूरदराज के क्षेत्रों में कई बार ऐसी शिकायतें मिलती रहती हैं कि शिक्षक ने अपने स्थान पर किसी अन्य को पढ़ाने के लिए रखा हुआ है।
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