भूकंप को लेकर भू-वैज्ञानिकों का 'खतरनाक' खुलासा
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नेपाल में शनिवार को आए विनाशकारी भूकंप का असर भारत की नॉर्दर्न बेल्ट के कई शहरों में महसूस किया गया। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.8 आंकी गई। विशेषज्ञों की बात मानें तो खतरा अभी टला नहीं है। नॉर्दर्न बेल्ट में भूकंप आते ही रहेंगे।
शनिवार को नेपाल में फ्रंटल थ्रस्ट के पास बने प्रेशर से झटका लगा, जिसे दून स्थित वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान की हर ऑब्जरवेटरी में रिकॉर्ड किया गया है। विशेषज्ञ चेताते हैं कि लोग भूकंपों के साथ जीना सीखें तो बेहतर होगा।
अपने देश में इंडियन-यूरेशियन प्लेट्स में होने वाले घर्षण के चलते बन रहा कोलिजन प्रेशर भूकंप की वजह है। प्लेट में हर साल पांच सेंटीमीटर उत्तर, उत्तर पूर्व की ओर मूवमेंट हो रहा है। इस लिहाज से देखें तो पूरी हिमालयन बेल्ट संवेदनशील है।
नेपाल में आए भूकंप की गहराई 12 किलोमीटर थी। अगर यह सतह पर होता तो और भी विनाशकारी हो सकता था।
उत्तराखंड के क्षेत्र जोन- 4 और 5 में
उत्तराखंड के इलाके भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील जोन-4 और 5 में रखे गए हैं। मसलन दून को जोन-4 में रखा गया है, जबकि रुद्रप्रयाग समेत आसपास के क्षेत्र और कुमाऊं में धारचूला आदि को जोन-5 में रखा गया है। भूकंप का पूर्वानुमान किया जाना बेहद मुश्किल है।
टिहरी बांध भी हो सकता है प्रभावित
टिहरी बांध का निर्माण हालांकि भूकंपरोधी तकनीक से हुआ है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर रिक्टर पैमाने पर 8 से अधिक तीव्रता का भूकंप आता है तो बांध प्रभावित हो सकता है।
वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान के वरिष्ठ भूकंप विशेषज्ञ डॉ. सुशील कुमार के अनुसार प्रभाव का पूर्व आकलन नहीं हो सकता, लेकिन प्रभाव होगा जरूर।
रिक्टर पैमाना और आब्जर्विंग इफेक्ट
0-1.9- सीस्मोग्राफ से ही पता चलता है
2-2.9- हल्का कंपन
3-3.9- कोई ट्रक नजदीक से गुजरे
4-4.9- खिड़कियां टूट सकती हैं, दीवार से फ्रेम गिर सकते हैं
5-5.9- फर्नीचर हिल सकता है
6-6.9- इमारतों की नींव दरक सकती है, ऊपरी मंजिल को नुकसान संभव
7-7.9- इमारतें गिर सकती हैं, जमीन फट सकती है
8-8.9- इमारतों सहित बड़े पुल गिर सकते हैं
9 से अधिक- पूरी तरह तबाही
सदी में 5.5 से अधिक तीव्रता वाले 21 भूकंप
हिमालय के अन्य क्षेत्रों की तरह गढ़वाल-कुमाऊं के क्षेत्र में भी धरती के नीचे भारी मात्रा में ऊर्जा एकत्र हो रही है, लेकिन इसे रिलीज होने का मौका नहीं मिल रहा। बीती सदी में रिक्टर पैमाने पर 5.5 से अधिक की तीव्रता वाले कुल 21 भूकंप रिकार्ड किए गए हैं।
अब तक आए 8 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप
शिलांग- 1897
कांगड़ा- 1905
बिहार-नेपाल- 1934
असम- 1950
एनडीएमए बता चुका 38 शहर संवेदनशील
भूकंप की दृष्टि से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिकरण (एनडीएमए) देश के 38 शहरों को संवेदनशील करार दे चुका। चार साल पहले आई एक रिपोर्ट की मानें तो इसमें दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई केसाथ ही हैदराबाद, दून जैसे शहर भी शामिल हैं।
यूं करें बचाव
भूकंपरोधी इमारतों का निर्माण जरूरी हो
भूकंप महसूस होते ही खुले में निकल जाएं
चौखट या बड़ी मेज के नीचे शरण लें
विशेषज्ञों से भूकंप बचाव की तकनीक सीखें