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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन को भूकंप का खतरा, वैज्ञानिकों ने बताए ये 'डेंजर' प्वाइंट

Fri, 24 Nov 2017 07:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 24 Nov 2017 07:54 AM IST
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Earthquake threat on Rishikesh-Karnprayag railway line

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन को भूकंप का खतरा बताया जा रहा है। इसका कारण वैज्ञ‌ानिकों के बताए ये डेंजर प्वाइंट है। पढ़िए पूरी खबर..

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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन चार भूकंपीय ‘थ्रस्ट’ से होकर गुजरेगी। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच में 16 पुल बनाए जाने हैं। ये पुल हिमालयी क्षेत्र में संभावित भूकंपों का झटका झेल सकें, इसके लिए यहां की जमीन की ताकत आंकी जा रही है।
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इस संबंध में आईआईटी रुड़की के भूकंप इंजीनियरिंग विभाग ने शुरुआती रिपोर्ट भी तैयार कर ली है। पुलों के अलावा उस भूमि की स्थिति भी देखी जा रही है जिस पर लाइन बिछाई जाएगी।
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उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बैनर तले ‘डिजास्टर रिजिलिएंट इनफ्रास्ट्रकचर इन दि हिमालयाज: आपॉरच्युनिटीज एंड चैलेंजेज’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम के अंतिम दिन वैज्ञानिक सत्र में बताया गया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन जहां बिछाई जा रही है, वहां के ‘ग्राउंड मोशन’ का आकलन चल रहा है।

इसके साथ ही यहां तरंगों की गति का भी पता लगाया जा रहा है। विज्ञानी पता कर रहे हैं कि अगर आठ या इससे अधिक तीव्रता (मैग्नीट्यूड) का भूकंप आएगा तो यहां तंरगों की गति किस हद तक बढ़ सकती है और यहां के निर्माण की क्या स्थिति होगी?

जहां मिट्टी, पानी होगा, वहां भूकंपीय तरंगों से अधिक दिक्कत

Earthquake threat on Rishikesh-Karnprayag railway line
earthquake

आईआईटी रुड़की के भूकंप इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर योगेंद्र सिंह ने बताया कि रेलवे पुलों की बर्दाश्त क्षमता का आकलन करवा रही है। इसी विभाग के डॉ. एमएल शर्मा ने बताया कि रेलवे लाइन पर 16 पुल बनेंगे।

ये पुल जिस जमीन पर बनेंगे उसके अंदर की क्षमता की रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके अलावा अन्य बिंदुओं पर आकलन चल रहा है। यहां चार भूकंपीय ‘थ्रस्ट’ हैं। ये मेन बाउंड्री थ्रस्ट (एमबीटी), श्रीनगर थ्रस्ट, उत्तरी और दक्षिणी अल्मोड़ा थ्रस्ट हैं।

उन्होंने बताया कि जहां मिट्टी, पानी होता है वहां भूकंपीय तरंगों से अधिक दिक्कत आती है। चट्टानों वाले इलाके में ऊर्जा आसानी से निकल जाती है।

तीन प्रकार की निकलती हैं तरंगें
-प्राइमरी तरंगें, ये 5 से 7 किमी प्रति सेकेंड की गति से जाती हैं
-सेकेंडरी तरंगें, ये 3 से 4 किमी प्रति सेंकेंड की गति से जाती हैं
-सर्फेस तंरगें, ये 2 से 3 किमी प्रति सेकेंड की गति से जाती हैं

 

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