फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   earthquake terror in delhi and uttarakhand.

हिमालय बेल्ट के फॉल्ट से दिल्ली और उत्तराखंड में भूकंप का खतरा

Sun, 07 Feb 2016 02:01 PM IST
अंकित कुमार गर्ग/ अमर उजाला, रुड़की
अंकित कुमार गर्ग/ अमर उजाला, रुड़की Updated Sun, 07 Feb 2016 02:01 PM IST
विज्ञापन
earthquake terror in delhi and uttarakhand.

हिमालयन बेल्ट में फाल्ट लाइन के कारण लगातार भूकंप के झटके आ रहे हैं। लेकिन इसी फाल्ट पर मौजूद उत्तराखंड में लंबे समय से बड़ी तीव्रता का भूकंप न आने से यहां बड़ा गैप बन हुआ है। जिससे राज्य हिमालयी क्षेत्र में आठ मैग्निट्यूड के भूकंप के बराबर ऊर्जा संचित हो रही है।

विज्ञापन


जो उत्तराखंड के आसपास हिमालयी क्षेत्र में आठ तीव्रता तक के भूकंप के खतरे की ओर संकेत कर रहा है। आईआईटी में किए गए शोध के मुताबिक यदि उत्तराखंड में 7.5 मैग्निट्यूड का भूकंप आता है तो इससे दिल्ली में भारतीय मानक कोड के अनुसार दिल्ली में बनाए गए आधे से ज्यादा भवनों को क्षति पहुंचने का अनुमान है। हालांकि भूकंप कब और कितनी तीव्रता का आएगा इसे लेकर वैज्ञानिक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
विज्ञापन


नेपाल में शुक्रवार की रात्रि 10 बजकर 10 मिनट पर 5.2 तीव्रता के भूंकप के झटके आए हैं। जिसका असर नेपाल से सटे बिहार के जिलों में भी महसूस किए गए हैं। इससे पूर्व चार जरवरी को हिमालयन बेल्ट के एक छोर पर मणिपुर में 6.8 तीव्रता का भूकंप आया था। जिसके चलते अब वैज्ञानिक उत्तराखंड को लेकर आशंकित नजर आ रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

काफी समय से बड़े भूकंप न आने से बना है गैप

earthquake terror in delhi and uttarakhand.

आईआईटी के अर्थक्वेक डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अशोक कुमार के अनुसार भूगर्भ में जितनी एनर्जी स्टोर हो रही है, उस लिहाज से उत्तराखंड में काफी समय से बड़े भूकंप नहीं आए हैं। जिसके कारण यहां एक बड़ा गैप बना हुआ है।

उन्होंने बताया कि हाल में भूकंप के लिहाज से दिल्ली के भवनों पर किए गए शोध से पता चलता है कि यदि उत्तराखंड में 7.5 से अधिक तीव्रता का भूकंप आता है तो इससे दिल्ली में धरती इतनी हिलेगी कि यहां भारत मानक कोड के हिसाब से बनी आधी से ज्यादा इमारतों को क्षति पहुंच सकती है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड क्षेत्र में अभी तक के भूकंप की बात करें तो 1999 में चमोली में आए भूकंप का मैग्निट्यूड 6.8, 1991 के उत्तरकाशी भूकंप का 6.6, 1980 के धारचूला भूकंप का 6.1 तथा 1975 में किन्नोर के भूकंप का मैग्निट्यूड 6.2 था। जिसके बाद  कहा जा सकता है कि हमें भविष्य के खतरे को देखते हुए अभी से कदम उठाने होंगे।

एक मैग्निट्यूट के बढ़ने से निकलती है 30 गुना एनर्जी

earthquake terror in delhi and uttarakhand.

वैज्ञानिकों के अनुसार भूकंप के दौरान मैग्निट्यूट की एक यूनिट बढ़ने के साथ ही पृथ्वी से निकलने वाली एनर्जी में 30 गुना वृद्धि होती है।

ऐसे में सात मैग्निट्यूट के 15 भूकंप से निकलने वाली ऊर्जा भी आठ मैग्निट्यूट के एक भूकंप से निकलने वाली ऊर्जा की बराबरी नहीं कर पाती। अर्थसाइंस डिपार्टमेंट के वैज्ञानिक प्रो. एके सराफ के अनुसार उत्तराखंड में लंबे समय से बड़े भूकंप न आने के कारण अब यहां ज्यादा खतरा बन गया है।

उत्तराखंड और दिल्ली को ज्यादा सचेत होने की जरूरत
उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में अधिकांश भवन कंक्रीट के बने हैं। दिक्कत यह है कि ज्यादातर भवनों में भूकंपरोधी मानकों का उपयोग नहीं किया गया है।

वैज्ञानिकों के अनुसार मणिपुर में चार जनवरी को आए 6.8 तीव्रता के भूकंप से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था। क्योंकि भूकंप के अभिकेंद्र के नजदीक बने ज्यादातर भवन बांस आदि के हल्के मैटीरियल के थे। लेकिन उत्तराखंड और दिल्ली में स्थिति ठीक इसके उलट है। ऐसे में यहां भूकंप के मद्देनजर सचेत होने की जरूरत है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed